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डिग्री कॉलेजों में अंशकालिक शिक्षकों के समायोजन की छूट

Wed, 01 Jun 2016 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 01 Jun 2016 01:10 AM IST
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Part-time teachers in degree colleges discount adjustment
शिक्षिका - फोटो : getty
हाईकोर्ट ने प्रदेश के डिग्री कालेजों में अंशकालिक शिक्षकों के समायोजन की छूट दे दी है मगर शर्त लगाई है कि जिन पदों को अधियाचित या विज्ञापित किया जा चुका है उन पर समायोजन नहीं किया जाएगा। उच्चतर सेवा आयोग के 26 मई 2014 के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर कोर्ट ने महाधिवक्ता को नोटिस जारी कर प्रदेश सरकार का पक्ष रखने को कहा है। कोर्ट ने अंश कालिक शिक्षकों को भी इस मामले मेें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
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डा. दीनानाथ यादव और अन्य की याचिका पर जस्टिस तरुण अग्रवाल और जस्टिस पीसी त्रिपाठी की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था प्रदेश सरकार ने डिग्री कॉलेजों में प्रवक्ताओं के रिक्त पदों पर अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग के एक्ट में 2014 में संशोधन कर दिया। चूंकि इन पदों पर नियमित नियुक्ति नहीं हो पा रही है इसलिए सरकार पदों पर अंशकालिक शिक्षकों को समायोजित करना चाहती है। जबकि प्रवक्ताओं के समायोजन का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। याचिका में दो मई 2016 को जारी शासनादेश को भी चुनौती दी गई है।
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कहा गया कि अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया 1998 के शासनादेश के तहत एक वर्ष के लिए की जाने का प्रावधान है। अनुराग त्रिपाठी केस में कोर्ट का आदेश है कि ऐसे प्रवक्ताओं को नियमित नहीं किया जाएगा। दो मई का शासनादेश इस आदेश का विरोधाभासी है इसलिए अवैध घोषित किया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार का कहना था कि नियमित नियुक्ति विवादों में उलझी होने के कारण के शिक्षण कार्य में हो रहे व्यवधान के मद्देनजर यह व्यवस्था की गई है। कोर्ट ने कहा कि स्टाप गैप व्यवस्था नियमित नियुक्ति का विकल्प नहीं हो सकती है।
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कोर्ट ने 2014 के संशोधन को प्रथम दृष्टया गलत मानते हुए कहा है कि जिन पदों का विज्ञापन जारी हो चुका है या जो पद आयोग को अधियाचित किए जा चुकेहैं, उन पर अंशकालिकों की नियुक्ति नहीं जाएगी। ऐसे पद जिन का विज्ञापन जारी नहीं है या जो अधियाचित नहीं किए गए हैं उन पर समायोजन किया जा सकता है। याचिका पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
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