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Paper Leak : उठे सवाल, अफसरों को सरकारी से ज्यादा निजी स्कूलों पर भरोसा क्यों, लगातार मामले आ रहे सामने

Wed, 26 Jun 2024 01:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 26 Jun 2024 01:15 PM IST
सार

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए ए-ग्रेड के विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। ज्यादातर केंद्र शहर में बनाए जाते हैं और सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन बाकी परीक्षाओं में ऐसा नहीं हो पा रहा है।

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Paper Leak: Questions raised, why do officers trust private schools more than government schools
यूपीपीएससी। UPPSC - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

परीक्षा के दौरान पेपर लीक में प्रिंटिंग प्रेसों के साथ संदिग्ध परीक्षा केंद्रों की संदिग्ध भूमिका भी लगातार सामने आ रही है। जिन केंद्रों से पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं, वे केंद्र निजी विद्यालय हैं। इसके बावजूद वर्षों से केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया में कोई सुधार नहीं किया गया। अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं कि यह लापरवाही है या ऐसा साजिशन किया जा रहा है।

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संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए ए-ग्रेड के विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। ज्यादातर केंद्र शहर में बनाए जाते हैं और सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन बाकी परीक्षाओं में ऐसा नहीं हो पा रहा है। अभ्यर्थियाें ने सवाल उठाए हैं कि अन्य परीक्षाओं में छोटे निजी विद्यालयों को केंद्र क्यों बनाया जा रहा है।
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उदाहरण के तौर पर आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2023 में शहर के कई महत्वपूर्ण विद्यालयों को छोड़ दिया गया था और शहर से 25-30 किमी दूर परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। शहर में भी कई ऐसे निजी विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था, जहां सीसीटीवी कैमरे और कमरों में खिड़कियां तक नहीं थीं। प्रीतम नगर स्थित एक निजी विद्यालय में परीक्षा देने पहुंचे विद्यार्थियों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि स्कूल के कई कमरों में खिड़कियां और दरवाजे तक नहीं थे।

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प्रतियोगी छात्रों ने सीएम से की पारदर्शी परीक्षा कराने की मांग

एसटीएफ जांच में बिशप जॉनसन गर्ल्स विंग से आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक होने का खुलासा किया गया, जो एक निजी विद्यालय है। वहीं, हाल में ही आयोजित यूजीसी नेट परीक्षा के लिए प्रयागराज में 33 केंद्र बनाए गए थे और परीक्षा के लिए केवल 20543 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। इनमें से केवल दो से तीन केंद्र ही शहर में थे और बाकी केंद्र शहर से काफी दूर बनाए गए थे।

सवाल उठ रहे हैं कि शहर में सरकारी स्कूलों की उपलब्धता के बावजूद परीक्षा केंद्र इतनी दूर क्यों बनाए गए? यमुनापार और गंगापार के कई ऐसे दूर दराज क्षेत्रों में यूजीसी नेट के लिए ऐसे परीक्षा केंद्र बनाए दिए गए थे, जहां अभ्यर्थियाें को पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ी। एक निजी कॉलेज को तो इसी साल मान्यता मिली और उसे यूजीसी नेट का परीक्षा केंद्र भी बना दिया गया।

प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय और अन्य प्रतियोगी छात्रों ने सीएम से मांग की है कि केंद्र निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक एवं पारदर्शी किया जाए। केंद्र निर्धारण में सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दी जाए और इसके बाद एडेड विद्यालयों और शहर में स्थित ए-ग्रेड के निजी विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाए। अगर केंद्र मानकों के अनुरूप नहीं है तो जिम्मेदार अफसर के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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