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पंचमी पर डुबकी लगा, तन-मन वासंती हुआ
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Thu, 02 Feb 2017 02:19 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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माघ मेले के चौथे मुख्य स्नानपर्व वसंत पंचमी पर बुधवार को रेती की अलग रौनक रही। कई वर्षों के बाद मौसम, पर्व के अनुकूल रहा तो डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता भी लगा। कल्पवासियों और देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के अतिरिक्त बड़ी संख्या में शहरी भी संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाने के लिए पहुंचे। स्नान का क्रम भोर से आरंभ होकर देर शाम तक जारी रहा। प्रशासन ने तकरीबन 75 लाख स्नानार्थियों के डुबकी लगाने का दावा किया है।
वसंत पंचमी पर डुबकी के लिए स्नानार्थियों में अद्भुत उत्साह दिखा। अन्य स्नानपर्वों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर अब तक जो स्नान करने के लिए रेती पर नहीं पहुंचे थे, वसंत की उमंग उन्हें रेती पर खींच लाई और लोग परिवार संग डुबकी लगाने पहुंचे। स्नान के बाद घाट किनारे ही पूजा-अर्चना की। गंगापुत्र घाटियों के यहां तिलक-चंदन लगवाया। तीर्थपुरोहितों को यथाशक्ति दान-दक्षिणा दिया। अनेक श्रद्धालुओं ने गोदान भी किया। भीड़ के बावजूद संगम नोज के पास पर्याप्त बेदिंग और सर्कुलेटिंग एरिया होने के कारण दबाव अपेक्षाकृत कम रहा।
पर्व पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती सहित अनेक प्रमुख संतों, महामंडलेश्वरों ने भी स्नान किया। बाहर से आए श्रद्धालुओं ने पूजा और दान के बाद वहीं रेती पर बैठकर लाई और तिल के लड्डुओं का प्रसाद चखा। महिलाओं ने गंगा की पूजा की और टोली में मगन होकर गंगा गीत भी गाए। इस बीच दो-दो महिलाएं एक दूसरे की साड़ी का छोर पकड़े उसे सुखाती रहीं। काफी दूर से ही वाहनों को रोक दिए जाने से संगम तक पहुंचने में जो थकान हुई थी, डुबकी लगाने के बाद वह जाने कहां काफूर हुई। स्नान करके जाने कितने श्रद्धालुओं की अरसे की आस पूरी हुई। डुबकी के बाद तन निर्मल हुआ और मन पवित्र। लोग पर्व का जल और रेती का प्रसाद लेकर घरों को लौटे।
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वसंत पंचमी पर डुबकी के लिए स्नानार्थियों में अद्भुत उत्साह दिखा। अन्य स्नानपर्वों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर अब तक जो स्नान करने के लिए रेती पर नहीं पहुंचे थे, वसंत की उमंग उन्हें रेती पर खींच लाई और लोग परिवार संग डुबकी लगाने पहुंचे। स्नान के बाद घाट किनारे ही पूजा-अर्चना की। गंगापुत्र घाटियों के यहां तिलक-चंदन लगवाया। तीर्थपुरोहितों को यथाशक्ति दान-दक्षिणा दिया। अनेक श्रद्धालुओं ने गोदान भी किया। भीड़ के बावजूद संगम नोज के पास पर्याप्त बेदिंग और सर्कुलेटिंग एरिया होने के कारण दबाव अपेक्षाकृत कम रहा।
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पर्व पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती सहित अनेक प्रमुख संतों, महामंडलेश्वरों ने भी स्नान किया। बाहर से आए श्रद्धालुओं ने पूजा और दान के बाद वहीं रेती पर बैठकर लाई और तिल के लड्डुओं का प्रसाद चखा। महिलाओं ने गंगा की पूजा की और टोली में मगन होकर गंगा गीत भी गाए। इस बीच दो-दो महिलाएं एक दूसरे की साड़ी का छोर पकड़े उसे सुखाती रहीं। काफी दूर से ही वाहनों को रोक दिए जाने से संगम तक पहुंचने में जो थकान हुई थी, डुबकी लगाने के बाद वह जाने कहां काफूर हुई। स्नान करके जाने कितने श्रद्धालुओं की अरसे की आस पूरी हुई। डुबकी के बाद तन निर्मल हुआ और मन पवित्र। लोग पर्व का जल और रेती का प्रसाद लेकर घरों को लौटे।
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