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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   pain of spilled over into farewell ceremony of Chief Justice Pritinker Diwaker of Allahabad High Court.

Prayagraj : इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का भी विदाई समारोह में छलका तबादले का दर्द

Thu, 23 Nov 2023 03:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 23 Nov 2023 03:05 PM IST
सार

2009 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जज बने प्रीतिंकर दिवाकर बीते 21 नवंबर को ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के बतौर सेवानिवृत्त हुए हैं। तीन अक्तूबर 2018 को उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट में किया गया था। इससे वह खुश नहीं थे।

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pain of spilled over into farewell ceremony of Chief Justice Pritinker Diwaker of Allahabad High Court.
न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी की तरह इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे प्रीतिंकर दिवाकर भी अपने तबादले का दर्द बयां कर चुके हैं। सोमवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से हुए विदाई समारोह में उन्होंने कहा था कि छत्तीसगढ़ से उनका इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादला दंड देने के इरादे से किया गया था, लेकिन यह पुरस्कार साबित हुआ। इस बहाने वह एशिया की सबसे बड़ी बार की खूबियों और काबिल वकीलों से परिचित हो सके।

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2009 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जज बने प्रीतिंकर दिवाकर बीते 21 नवंबर को ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के बतौर सेवानिवृत्त हुए हैं। तीन अक्तूबर 2018 को उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट में किया गया था। इससे वह खुश नहीं थे। बरसों से सीने में दबा उनका यह दर्द सोमवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से रखे गए विदाई समारोह में छलक आया। कहा, मेरा स्थानांतरण दंडित करने के इरादे से किया गया था। लेकिन, जैसा कि भाग्य ने चाहा, यह स्थानांतरण वरदान बन गया।

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हाईकोर्ट और बार का बहुत सारा प्यार और सहयोग मिला। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ वाले कोलेजियम ने मेरा नाम मुख्य न्यायाधीश के लिए आगे बढ़ाया। मेरे साथ हुए अन्याय को सुधारा। उन्होंने कहा, जीवन एक परीक्षा है, परिणाम नहीं। सच बात यह है कि कर्म इसे तय करता है। अच्छा काम हमेशा अपनी छाप छोड़कर जाता है। हाईकोर्ट में सीमित संसाधनों के बावजूद उसे आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। बाहर रहकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की आलोचना करने वालों को अंदर से इसका काम देखना चाहिए।

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