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Prayagraj News: एक साल में नदी और तालाबों में डूबकर 40 से ज्यादा मासूमों ने गंवाई जान
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जिले की नदियों और तालाबों में नहाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिलेभर में बीते एक साल में डूबने से 40 से ज्यादा मासूमों और युवाओं की मौत हुई है। इनमें अधिकांश हादसे खेलने-कूदने, मोबाइल पर रील बनाने, दोस्तों के साथ पार्टी करने और स्टंट के दौरान हुए हैं।
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में यमुना, गंगा नदी और तालाबों में डूबने से करीब 40 मौतें हुई हैं। इनमें अधिकतर मौत नाबालिगों की हुई है। इस दौरान कई युवक और नाबालिग गहरे पानी का अंदाजा लगाए बिना नदी और तालाबों में छलांग लगा देते हैं। कुछ को तैरना भी नहीं आता। इसके बाद भी वे जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटते।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने की होड़ भी हादसों की बड़ी वजह बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश घाटों और तालाबों पर सुरक्षा इंतजाम न के बराबर हैं। कई जगह चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगे हैं। हादसे के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता दिखाई देता है।
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केस-एक
27 मार्च 2026 मांडा क्षेत्र के बामपुर गांव स्थित गंगा घाट पर गंगा स्नान करने गए सात किशोर गंगा में समा गए। तीन को किसी तरह बाहर निकाल लिया गया। जबकि चार किशोर की मौत हो गई थी। रामनवमी के अवसर पर सभी स्नान करने गए थे। इसी दौरान गहराई में जाने से सभी बच्चे डूब गए।
केस-दो
14 जनवरी 2026 पुरामुफ्ती इलाके के केशवपुर कुसुआ गांव में एक तालाब में डूबने से एक युवक और तीन बच्चों की मौत हो गई। मृतक बच्चों की उम्र 10 से 11 वर्ष के बीच थी। परिजनों के हत्या की आशंका पर पुलिस ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी। घर के बाहर खेलने के दौरान बच्चे बिना बताए नहाने गए थे।
केस-तीन
14 अप्रैल 2026 को झूंसी के सोडम आश्रम घाट के पास गंगा नदी में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई। गहरे पानी में जाने से यह हादसा हुआ, जिसके बाद पुलिस और गोताखोरों की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शवों को बाहर निकाला। दोनों बच्चे बिना बताए घर से गंगा में नहाने आए थे।
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पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में यमुना, गंगा नदी और तालाबों में डूबने से करीब 40 मौतें हुई हैं। इनमें अधिकतर मौत नाबालिगों की हुई है। इस दौरान कई युवक और नाबालिग गहरे पानी का अंदाजा लगाए बिना नदी और तालाबों में छलांग लगा देते हैं। कुछ को तैरना भी नहीं आता। इसके बाद भी वे जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटते।
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने की होड़ भी हादसों की बड़ी वजह बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश घाटों और तालाबों पर सुरक्षा इंतजाम न के बराबर हैं। कई जगह चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगे हैं। हादसे के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता दिखाई देता है।
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केस-एक
27 मार्च 2026 मांडा क्षेत्र के बामपुर गांव स्थित गंगा घाट पर गंगा स्नान करने गए सात किशोर गंगा में समा गए। तीन को किसी तरह बाहर निकाल लिया गया। जबकि चार किशोर की मौत हो गई थी। रामनवमी के अवसर पर सभी स्नान करने गए थे। इसी दौरान गहराई में जाने से सभी बच्चे डूब गए।
केस-दो
14 जनवरी 2026 पुरामुफ्ती इलाके के केशवपुर कुसुआ गांव में एक तालाब में डूबने से एक युवक और तीन बच्चों की मौत हो गई। मृतक बच्चों की उम्र 10 से 11 वर्ष के बीच थी। परिजनों के हत्या की आशंका पर पुलिस ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी। घर के बाहर खेलने के दौरान बच्चे बिना बताए नहाने गए थे।
केस-तीन
14 अप्रैल 2026 को झूंसी के सोडम आश्रम घाट के पास गंगा नदी में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई। गहरे पानी में जाने से यह हादसा हुआ, जिसके बाद पुलिस और गोताखोरों की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शवों को बाहर निकाला। दोनों बच्चे बिना बताए घर से गंगा में नहाने आए थे।