Prayagraj : बच्चों में बढ़ा ठंड का प्रकोप, चिल्ड्रेन अस्पताल के बेड फुल, बुजुर्गों पर भी दिख रहा असर
साल की शुरूआत के साथ ही ठंड की मार तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में बुर्जुगों के साथ ही छोटे बच्चों पर इसका ज्यादा असर दिख रहा है। छोटे बच्चे बीमार होकर तेजी से अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। इन बच्चों में सबसे अधिक सांस की बीमारी की दिक्कत है।
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साल की शुरूआत के साथ ही ठंड की मार तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में बुर्जुगों के साथ ही छोटे बच्चों पर इसका ज्यादा असर दिख रहा है। छोटे बच्चे बीमार होकर तेजी से अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। इन बच्चों में सबसे अधिक सांस की बीमारी की दिक्कत है। उनका रेस्परेटरी सिस्टम फेल्योर हो रहा है। इसकी वजह से फेफड़े जाम हो रहे हैं और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। यही कारण है कि बच्चे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंच रहे हैं।
सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (चिल्ड्रेन अस्पताल) में लगातार गंभीर हालत में एडमिट हो रहे है। इसके कारण इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर वार्ड लगभग फुल हो चुके हैं। चिल्ड्रेन अस्पताल में रोजाना पांच साल से कम उम्र के 15 से 25 बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। वहीं ठीक होने वाले बच्चों की संख्या काफी कम है। ऐसे में 120 बेड वाला यह अस्पताल लगभग हाउसफुल हो चुका है।
डॉक्टरों का कहना है कि जब तक तापमान सामान्य स्थिति में नही पहुंचेगा, बच्चों पर कहर बरपाता रहेगा। इन कारणों से बीमार हो रहे बच्चों में रेस्परेटरी सिस्टम का इंफेक्टेड हो जाना बीमारी का प्रमुख कारण बना हुआ है। साफ सफाई पर ध्यान नही देने और सही प्रकार से नियमित टीकाकरण नहीं करवाने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
इसके अलावा भीषण ठंड में कुपोषण, खानपान में कमी, मां का दूध न मिल पाना, कमजोर इम्युनिटी की वजह से भी बच्चों में गंभीर समस्याएं बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआतीस्त्रत्त् लक्षणों पर ध्यान नहीं देने से बच्चों के फेफड़ों में संक्रमण और फ्लूड भर जाना आम बात है। इससे वह गंभीर निमोनिया का शिकार हो जाता है। कई मामले ऐसे भी आए जब झोलाछाप डॉक्टरों ने केस बिगाडने के बाद रेफर किया।
इन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी
- बुखार, खांसी, सांस फूलना, खाना बंद कर देनाबीमारी से बचाना है तो फॉलो करें
- बच्चों का नियमित टीकाकरण जरूरी
- डीपीटी, एचएन इन्फ्लुएंजी बी, बीसीजी, मीजल्स आदि के टीके बच्चों को निमोनिया आदि फेफड़ों की बीमारी से बचाते हैं
- नीमोकोकल वैक्सीन से मिलते हैं कई फायदे
- छह माह तक मां का दूध पिलाएं
- इसके बाद पोष्टिक आहार देकर कुपोषण से बचाना जरूरी
- गर्म जगह पर बच्चे को रखें
- नवजात शिशुओं को हाइपोथर्मिया से बचाना जरूरी
- ठंड बढ़ने के साथ ही गंभीर निमोनिया से पीड़ित बच्चे अधिक आ रहे हैं। उनका रेस्परेटरी सिस्टम इंफेक्टेड या कमजोर होने से बीमार हो रहे हैं। इसके पीछे कई बार अभिभावकों की लापरवाही बड़ा कारण बनता है। - डॉ. मुकेश वीर सिंह, विभागाध्यक्ष, चिल्ड्रेन अस्पताल, प्रयागराज