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Court Order : सीलबंद लिफाफे में रखी गई पदोन्नति रिपोर्ट पर फैसला लेने का आदेश

Sat, 23 May 2026 05:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 23 May 2026 05:35 PM IST
सार

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की इलाहाबाद पीठ ने सोशल मीडिया पर विभागीय भर्ती और कार्यवाही से जुड़े वीडियो अपलोड करने के आरोप में सीलबंद लिफाफे में रखी गई कर्मचारी की पदोन्नति रिपोर्ट पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।

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Order to take decision on promotion report kept in sealed envelope
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की इलाहाबाद पीठ ने सोशल मीडिया पर विभागीय भर्ती और कार्यवाही से जुड़े वीडियो अपलोड करने के आरोप में सीलबंद लिफाफे में रखी गई कर्मचारी की पदोन्नति रिपोर्ट पर फैसला लेने का निर्देश दिया है। पीठ ने संबंधित प्राधिकारी को एक माह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने को कहा है।

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यह आदेश (न्यायिक सदस्य) न्यायमूर्ति राजीव जोशी और (प्रशासनिक सदस्य) अंजनी नंदन शरण की पीठ ने राकेश कुमार की याचिका पर दिया। लखनऊ निवासी राकेश कुमार वर्तमान में कानपुर स्थित सीनियर क्वालिटी एश्योरेंस एस्टैब्लिशमेंट (स्मॉल आर्म्स) में स्टोर कीपर के पद पर कार्यरत हैं। आरोप था कि उन्होंने विभागीय भर्ती एवं कार्यवाही से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपलोड किए। भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बाद में विभागीय जांच पूरी होने पर 18 जून 2024 को केवल एडवाइजरी जारी कर कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
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याचिका में मांग की थी कि 2019-20 में विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) ने उन्हें सीनियर स्टोर कीपर पद पर पदोन्नति के लिए विचार किया था। लेकिन विभागीय कार्रवाई लंबित होने के कारण उनकी संस्तुति को सीलबंद लिफाफे में रख दिया गया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि राकेश कुमार ने 16 अगस्त 2024 को प्रतिवेदन दिया। बाद में 28 दिसंबर 2025 और 29 मार्च 2026 को अनुस्मारक भी भेजे। लेकिन विभाग ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया।
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सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने भी लंबित अभ्यावेदन के निस्तारण पर कोई आपत्ति नहीं जताई। न्यायाधिकरण ने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि प्रमाणित प्रति प्राप्त होने से एक माह के भीतर कानून के अनुसार कारणयुक्त और स्पष्ट आदेश पारित कर उसकी सूचना याची को दी जाए। न्यायाधिकरण ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

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