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डीएवी डिग्री कॉलेज के लाइब्रेरियन को वेतन भुगतान का आदेश
Fri, 27 Nov 2020 07:09 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 27 Nov 2020 07:09 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएवी डिग्री कॉलेज वाराणसी के लाइब्रेरियन डा. कृष्ण कुमार को नवंबर माह तक वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारी अदालत में उपस्थित हों। डा. कृष्ण कुमार अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्र ने दिया है।
याची का कहना है कि उसके खिलाफ कमेटी ऑफ मैनेजमेंट के मैनेजर ने विभागीय जांच बैठाई थी। जिसमें उसे सजा केतौर पर 11 सितंबर 2017 को एडवांस इंक्रीमेंट का भुगतान रोकते हुए उसकी रिकवरी का आदेश दिया गया। उसे डिप्टी लाइब्रेरियन के पद पर वापस भेज दिया गया तथा सर्विस रिकार्ड में प्रतिकूल प्रविष्ठि का आदेश दिया गया। याची ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने याची के विरुद्ध पारित आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद भी याची का वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है।
कालेज के अधिवक्ता का कहना था कि स्थगन आदेश को समाप्त करने की अर्जी दाखिल की गई है क्योंकि उक्त आदेश एकपक्षीय था। याची के अधिवक्ता का कहना था कि आदेश प्रदेश सरकार और यूजीसी के अधिवक्ता की मौजूदगी में पारित किया गया है। वेतन का भुगतान राज्य सरकार को करना है इसलिए यह कहा जा सकता है कि आदेश एक पक्षीय था। एक बाद दंडात्मक आदेश पर रोक लग गई तो याची पूर्व की भांति वेतन पाने का हकदार है। कोर्ट ने याची को आदेश के पूर्व की भांति ही वेतन भुगतान करने का आदेश दिया है।
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याची का कहना है कि उसके खिलाफ कमेटी ऑफ मैनेजमेंट के मैनेजर ने विभागीय जांच बैठाई थी। जिसमें उसे सजा केतौर पर 11 सितंबर 2017 को एडवांस इंक्रीमेंट का भुगतान रोकते हुए उसकी रिकवरी का आदेश दिया गया। उसे डिप्टी लाइब्रेरियन के पद पर वापस भेज दिया गया तथा सर्विस रिकार्ड में प्रतिकूल प्रविष्ठि का आदेश दिया गया। याची ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने याची के विरुद्ध पारित आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद भी याची का वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है।
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कालेज के अधिवक्ता का कहना था कि स्थगन आदेश को समाप्त करने की अर्जी दाखिल की गई है क्योंकि उक्त आदेश एकपक्षीय था। याची के अधिवक्ता का कहना था कि आदेश प्रदेश सरकार और यूजीसी के अधिवक्ता की मौजूदगी में पारित किया गया है। वेतन का भुगतान राज्य सरकार को करना है इसलिए यह कहा जा सकता है कि आदेश एक पक्षीय था। एक बाद दंडात्मक आदेश पर रोक लग गई तो याची पूर्व की भांति वेतन पाने का हकदार है। कोर्ट ने याची को आदेश के पूर्व की भांति ही वेतन भुगतान करने का आदेश दिया है।
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