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High Court : तदर्थ सेवाओं को जोड़कर पेंशन देने का आदेश, उप शिक्षा निदेशक का आदेश रद्द
Sat, 06 Jun 2026 05:23 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 06 Jun 2026 05:23 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तदर्थ (एडहॉक) सेवाओं को जोड़कर पेंशन और अन्य लाभ देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकल पीठ ने तदर्थ सेवा जोड़कर लाभ देने से इन्कार करने वाला कानपुर के उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) के आदेश को रद्द कर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तदर्थ (एडहॉक) सेवाओं को जोड़कर पेंशन और अन्य लाभ देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकल पीठ ने तदर्थ सेवा जोड़कर लाभ देने से इन्कार करने वाला कानपुर के उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) के आदेश को रद्द कर दिया है।
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याची रमेश सिंह चौहान और तीन अन्य ने याचिका दाखिल कर तदर्थ सेवाकाल को जोड़ते हुए पेंशन और वेतन लाभ की गणना करने की मांग की। याचियों का कहना था कि उप शिक्षा निदेशक ने उनके दावों को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है।
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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि तदर्थ नियुक्त कर्मचारियों की पिछली सेवाओं को पेंशन प्रयोजनों के लिए ध्यान में रखने का मुद्दा पहले ही नंद लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में तय हो चुका है। इस निर्णय पर राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अपील भी खारिज हो चुकी है और सर्वोच्च न्यायालय की ओर से भी इस पर मुहर लगाई जा चुकी है।
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पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि वर्तमान मामला पूर्व में तय किए गए नंद लाल केस और अन्य संबंधित फैसलों से पूरी तरह आच्छादित है। इसलिए प्रतिवादी के पास लाभों को रोकने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने विवादित 6 मई 2026 के आदेश को रद्द करते हुए याचियों को पेंशन और देय बकाया का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।