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लाक डाउन में फंसे आयातित माल का किराया वसूली पर निर्णय लेने का आदेश
Fri, 26 Jun 2020 07:46 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 26 Jun 2020 07:46 PM IST
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- फोटो : prayagraj
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लाक डाउन के दौरान विदेशों से आयातित माल के कारको डिपो दादरी में ही फंसे रहने के दौरान का डिपो द्वारा किराया वसूलने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। मेसर्स मानिक्य क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड ने याचिका दाखिल कर कहा है कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद लाक डाउन के दौरान इनलैंड कारगो डिपो दादरी में डंप पड़े माल का किराया वसूला जा रहा है।
जबकि केंद्र सरकार और शिपिंग मंत्रालय की ओर अप्रैल से मई माह में जारी कई आदेशों में कहा गया है कि लाक डाउन के कारण जिनका माल डिपो में ही फंसा रह गया है उनसे किराया न वसूला जाए। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने कारगो डिपो को याची कंपनी के प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, अभिनव गौर और विभू राय आदि का कहना था कि याची कंपनी ने कैल्शियम कार्बोनेट का आयात वियतनाम से किया था। 13 और 19 मार्च को उसका माल कारगो डिपो दादरी में पहुंचा। 22 मार्च से पूरे देश में लाक डाउन लागू हो गया जिसकी वजह से याची डिपो से अपना माल उठा नहीं सका।
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नियमानुसार डिपो से माल उठाने के लिए 14 दिन का समय होता है। इसके बाद डिपो किराया वसूल सकता है। मगर लाक डाउन को देखते हुए शिपिंग मंत्रालय ने देश भर के सभी कारगो डिपो को पत्र जारी कर लाक डाउन की अवधि का किराया नहीं वसूलने का आदेश दिया था।
कहा गया कि केंद्र सरकार का यह आदेश सभी डिपो पर बाध्यकारी है। कारगो डिपो दादरी सरकारी क्षेत्र का उपक्रम है इसके बावजूद डिपो ने याची कंपनी पर 25,65,800 रुपये का वसूली नोटिस जारी कर दिया। कंपनी ने इस बाबत डिपो को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है मगर उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। कोर्ट ने कारगो कार्रेपोरेशन ऑफ इंडिया को याची कंपनी के प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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जबकि केंद्र सरकार और शिपिंग मंत्रालय की ओर अप्रैल से मई माह में जारी कई आदेशों में कहा गया है कि लाक डाउन के कारण जिनका माल डिपो में ही फंसा रह गया है उनसे किराया न वसूला जाए। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने कारगो डिपो को याची कंपनी के प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, अभिनव गौर और विभू राय आदि का कहना था कि याची कंपनी ने कैल्शियम कार्बोनेट का आयात वियतनाम से किया था। 13 और 19 मार्च को उसका माल कारगो डिपो दादरी में पहुंचा। 22 मार्च से पूरे देश में लाक डाउन लागू हो गया जिसकी वजह से याची डिपो से अपना माल उठा नहीं सका।
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नियमानुसार डिपो से माल उठाने के लिए 14 दिन का समय होता है। इसके बाद डिपो किराया वसूल सकता है। मगर लाक डाउन को देखते हुए शिपिंग मंत्रालय ने देश भर के सभी कारगो डिपो को पत्र जारी कर लाक डाउन की अवधि का किराया नहीं वसूलने का आदेश दिया था।
कहा गया कि केंद्र सरकार का यह आदेश सभी डिपो पर बाध्यकारी है। कारगो डिपो दादरी सरकारी क्षेत्र का उपक्रम है इसके बावजूद डिपो ने याची कंपनी पर 25,65,800 रुपये का वसूली नोटिस जारी कर दिया। कंपनी ने इस बाबत डिपो को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है मगर उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। कोर्ट ने कारगो कार्रेपोरेशन ऑफ इंडिया को याची कंपनी के प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।