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मूल अक्षयवट का नया रास्ता खुला
Sun, 23 Dec 2018 01:57 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 23 Dec 2018 01:57 AM IST
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प्रयागराज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो,प्रयागराज
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सेना की सहमति के बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण प्रशासन ने मूल अक्षयवट का नया रास्ता खुलवा दिया। किला द्वार पर स्थित राधाकृष्ण-राम जानकी मंदिर को आधी रात को ही शिफ्ट करा दिया गया। इसके बाद किले के पूर्वी हिस्से की दीवार तोड़ दी गई। मलबा हटाने के साथ ही मूल अक्षयवट मार्ग को बनाने का काम तेज कर दिया गया है, ताकि कुंभ के दौरान देश दुनिया से आने वाले करोड़ों श्रद्धालु त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही इस पौराणिक वृक्ष के सुगमता से दर्शन कर सकें।
लंबे समय से अकबर के किले में सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित मूल अक्षयवट के दर्शन-पूजन का मार्ग शनिवार को प्रशस्त हो गया। ऐतिहासिक किले के पूर्वी प्रवेश द्वार की दक्षिणी दीवार खोलकर मूल अक्षयवट में प्रवेश के लिए मेला प्रशासन ने रास्ता बनवा दिया। इस रास्ते को खोलने के लिए मेला प्रशासन को लंबी मशक्कत करनी पड़ी। कई दिनों की कोशिश केबाद आखिरकार सेना के साथ किला द्वार पर स्थित राधा कृष्ण-राम जानकी मंदिर को हटाने पर सहमति बन गई। मेला प्रशासन का मानना था कि वहां से मंदिर शिफ्ट करा देने पर श्रद्धालुओं को मूल अक्षयवट के नए रास्ते पर प्रवेश देने में आसानी हो जाएगी, लेकिन सेना के उच्च अफसरों की सहमति न मिल पाने की वजह से इसमें दिक्कतें आ रही थीं।
सहमति मिलने के बाद शुक्रवार की आधी रात को भारी फोर्स की मौजूदगी में कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने किला पहुंचकर मंदिर केपुजारी पद्मनाथ योगेश्वर और शिव ओम योगेश्वर से वार्ता की। मेलाधिकारी ने उनको समझाया कि पातालपुरी मंदिर उनके ही पुजारी परिवार का है। ऐसे में राधाकृष्ण व राम जानकी, हनुमान की प्रतिमाओं को पातालपुरी में शिफ्ट करा दिया जाए। पुजारी पद्मनाथ ने अमर उजाला को बताया कि वह वहीं खड़े रहे और फिर प्रशासन ने मजदूरों को लगाकर मंदिर को हटवाना शुरू कर दिया। आधी रात को ही प्रतिमाओं को पातालपुरी के बरगद के पेड़ के पास शिफ्ट करा दिया गया। इसके बाद किले की दक्षिणी दीवार तोड़कर मूल अक्षयवट का मार्ग खुलवा दिया गया। मंदिर की छत और दीवारों को हटाने का काम रात भर चला।
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ऐतिहासिक किले के द्वार पर स्थित मंदिर की प्रतिमाओं को सबसे पहले खोदकर निकाला गया। वहां स्थित राम जानकी लक्ष्मण, हनुमान के अलावा राधा कृष्ण व शिव की प्रतिमाओं को वहां से निकाल कर पातालपुरी में रखवा दिया गया। रात 2:30 बजे प्रतिमाएं पातालपुरी में रखवाने के बाद पुजारी पद्मनाथ घर आए। शनिवार की सुबह पातालपुरी में ही जाकर उन्होंने प्रतिमाओं की पूजा, आरती की।
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लंबे समय से अकबर के किले में सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित मूल अक्षयवट के दर्शन-पूजन का मार्ग शनिवार को प्रशस्त हो गया। ऐतिहासिक किले के पूर्वी प्रवेश द्वार की दक्षिणी दीवार खोलकर मूल अक्षयवट में प्रवेश के लिए मेला प्रशासन ने रास्ता बनवा दिया। इस रास्ते को खोलने के लिए मेला प्रशासन को लंबी मशक्कत करनी पड़ी। कई दिनों की कोशिश केबाद आखिरकार सेना के साथ किला द्वार पर स्थित राधा कृष्ण-राम जानकी मंदिर को हटाने पर सहमति बन गई। मेला प्रशासन का मानना था कि वहां से मंदिर शिफ्ट करा देने पर श्रद्धालुओं को मूल अक्षयवट के नए रास्ते पर प्रवेश देने में आसानी हो जाएगी, लेकिन सेना के उच्च अफसरों की सहमति न मिल पाने की वजह से इसमें दिक्कतें आ रही थीं।
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सहमति मिलने के बाद शुक्रवार की आधी रात को भारी फोर्स की मौजूदगी में कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने किला पहुंचकर मंदिर केपुजारी पद्मनाथ योगेश्वर और शिव ओम योगेश्वर से वार्ता की। मेलाधिकारी ने उनको समझाया कि पातालपुरी मंदिर उनके ही पुजारी परिवार का है। ऐसे में राधाकृष्ण व राम जानकी, हनुमान की प्रतिमाओं को पातालपुरी में शिफ्ट करा दिया जाए। पुजारी पद्मनाथ ने अमर उजाला को बताया कि वह वहीं खड़े रहे और फिर प्रशासन ने मजदूरों को लगाकर मंदिर को हटवाना शुरू कर दिया। आधी रात को ही प्रतिमाओं को पातालपुरी के बरगद के पेड़ के पास शिफ्ट करा दिया गया। इसके बाद किले की दक्षिणी दीवार तोड़कर मूल अक्षयवट का मार्ग खुलवा दिया गया। मंदिर की छत और दीवारों को हटाने का काम रात भर चला।
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ऐतिहासिक किले के द्वार पर स्थित मंदिर की प्रतिमाओं को सबसे पहले खोदकर निकाला गया। वहां स्थित राम जानकी लक्ष्मण, हनुमान के अलावा राधा कृष्ण व शिव की प्रतिमाओं को वहां से निकाल कर पातालपुरी में रखवा दिया गया। रात 2:30 बजे प्रतिमाएं पातालपुरी में रखवाने के बाद पुजारी पद्मनाथ घर आए। शनिवार की सुबह पातालपुरी में ही जाकर उन्होंने प्रतिमाओं की पूजा, आरती की।