फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Open new path of akshaywat

मूल अक्षयवट का नया रास्ता खुला, आधी रात किला द्वार से राधाकृष्ण-रामजानकी मंदिर कराया गया शिफ्ट

Sat, 22 Dec 2018 10:34 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 22 Dec 2018 10:34 PM IST
विज्ञापन
Open new path of akshaywat
पीएम मोदी अक्षयवट के दर्शन करते हुए - फोटो : अमर उजाला

सेना की सहमति के बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण प्रशासन ने मूल अक्षयवट का नया रास्ता खुलवा दिया। किला द्वार पर स्थित राधाकृष्ण-राम जानकी मंदिर को आधी रात को ही शिफ्ट करा दिया गया। इसके बाद किले के पूर्वी हिस्से की दीवार तोड़ दी गई। मलबा हटाने के साथ ही मूल अक्षयवट मार्ग को बनाने का काम तेज कर दिया गया है, ताकि कुंभ के दौरान देश दुनिया से आने वाले करोड़ों श्रद्धालु त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही इस पौराणिक वृक्ष के सुगमता से दर्शन कर सकें।

विज्ञापन


लंबे समय से अकबर के किले में सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित मूल अक्षयवट के दर्शन-पूजन का मार्ग शनिवार को प्रशस्त हो गया। ऐतिहासिक किले के पूर्वी प्रवेश द्वार की दक्षिणी दीवार खोलकर मूल अक्षयवट में प्रवेश के लिए मेला प्रशासन ने रास्ता बनवा दिया। इस रास्ते को खोलने के लिए मेला प्रशासन को लंबी मशक्कत करनी पड़ी। कई दिनों की कोशिश के बाद आखिरकार सेना के साथ किला द्वार पर स्थित राधा कृष्ण-राम जानकी मंदिर को हटाने पर सहमति बन गई। 
विज्ञापन


मेला प्रशासन का मानना था कि वहां से मंदिर शिफ्ट करा देने पर श्रद्धालुओं को मूल अक्षयवट के नए रास्ते पर प्रवेश देने में आसानी हो जाएगी, लेकिन सेना के उच्च अफसरों की सहमति न मिल पाने की वजह से इसमें दिक्कतें आ रही थीं। सहमति मिलने के बाद शुक्रवार की आधी रात को भारी फोर्स की मौजूदगी में कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने किला पहुंचकर मंदिर के पुजारी पद्मनाथ योगेश्वर और शिव ओम योगेश्वर से वार्ता की। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मेलाधिकारी ने उनको समझाया कि पातालपुरी मंदिर उनके ही पुजारी परिवार का है। ऐसे में राधाकृष्ण व राम जानकी, हनुमान की प्रतिमाओं को पातालपुरी में शिफ्ट करा दिया जाए। पुजारी पद्मनाथ ने अमर उजाला को बताया कि वह वहीं खड़े रहे और फिर प्रशासन ने मजदूरों को लगाकर मंदिर को हटवाना शुरू कर दिया। आधी रात को ही प्रतिमाओं को पातालपुरी के बरगद के पेड़ के पास शिफ्ट करा दिया गया। इसके बाद किले की दक्षिणी दीवार तोड़कर मूल अक्षयवट का मार्ग खुलवा दिया गया। मंदिर की छत और दीवारों को हटाने का काम रात भर चला।


सबसे पहले हटाई गईं देव प्रतिमाएं, पातालपुरी में शिफ्टिंग 
ऐतिहासिक किले के द्वार पर स्थित मंदिर की प्रतिमाओं को सबसे पहले खोदकर निकाला गया। वहां स्थित राम जानकी लक्ष्मण, हनुमान के अलावा राधा कृष्ण व शिव की प्रतिमाओं को वहां से निकाल कर पातालपुरी में रखवा दिया गया। रात 2:30 बजे प्रतिमाएं पातालपुरी में रखवाने के बाद पुजारी पद्मनाथ घर आए। शनिवार की सुबह पातालपुरी में ही जाकर उन्होंने प्रतिमाओं की पूजा, आरती की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed