गजब : खुद को जिंदा साबित करने में लग गए 60 दिन, महिला समेत तीन के खिलाफ केस दर्ज
दो महीने तक राजू जिलाधिकारी से लेकर यमुना नगर डीसीपी, एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों के पास जाकर अपने जिंदा होने का सुबूत देता रहा। अब जाकर महिला व उसके दो बेटों के खिलाफ नैनी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
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नैनी की पीडीए कॉलोनी निवासी राजू शर्मा को खुद को जिंदा साबित करने में 60 दिन लग गए। वर्षों से उनके घर में किराए पर रह रही महिला ने उनकी फर्जी पत्नी बन उन्हें मृत दर्शाया। फिर कूटरचित तरीके से जमीन व मकान अपने नाम कराकर बेंच दी थी। दो महीने तक राजू जिलाधिकारी से लेकर यमुना नगर डीसीपी, एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों के पास जाकर अपने जिंदा होने का सुबूत देता रहा। अब जाकर महिला व उसके दो बेटों के खिलाफ नैनी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
राजू ने बताया कि करीब 20 साल से उनके घर में नीलम शर्मा अपने पति व दो बच्चों के साथ किराए पर रहती थी। 2011 में नीलम परिवार के साथ अपने ससुराल बिहार चली गई। एक साल बाद वह अपने पति से तलाक लेकर दोनों बच्चों के साथ दोबारा उनके घर में रहने के लिए आई। घर में सिलाई का काम करने लगी। उसी समय राजू का भी पत्नी से अनबन हो गया और वह तमिलनाडु में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने के लिए चला गया। कई सालों तक वहां रहा। नीलम हर महीने उसे किराया भेज दिया करती थी। बीच-बीच में वह घर पर आता और कुछ दिन रहने के बाद वापस ड्यूटी पर लौट जाता।
राजू ने बताया कि उसकी एक बेटी है, जिसकी शादी वह खुद करना चाहता था। उसकी शादी के लिए पैसे की जरूरत पड़ी तो वह 17 जनवरी को तमिलनाडु से नैनी अपने घर आया और अपने नाम की जमीन बेचने के लिए कुछ लोगों से बात की। उसी समय खतौनी निकलवाया तो पता चला कि वह जमीन तो उसके नाम ही नहीं है। करछना तहसील गया तो पता चला कि उसके मकान में किराए पर रह रही नीलम ने कूटरचित तरीके से अपने सभी कागजात में राजू को अपना पति बनाया। बाद में उसे मृत दिखाकर पूरी जमीन व मकान अपने नाम कराकर दूसरों के हाथों बेंच दी। इतना ही नहीं, नीलम ने एक ही जमीन को दो लोगों को बेंची।
एक लाख किया खर्च
राजू ने बताया कि दो महीनों में उन्होंने करी एक लाख रुपये खर्चा कर दिए। फिलहाल काफी प्रयासों के बाद 16 मार्च को आरोपी महिला नीलम शर्मा व उसके दाे बेटों के खिलाफ नैनी थाने की पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जमीन काे राजू के नाम हुई। राजू का आरोप है कि एफआईआर के बाद भी पीडीए उसके नाम मकान नहीं कर रहा है। कई बार जाकर वहां के संबंधित अधिकारियों से इस मामले का सुबूत दे चुका है।