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एसडीएम के केवल 22, एनटी के सर्वाधिक 114 पद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 20 Jan 2018 01:29 AM IST
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पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 में जिन 14032 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया है, उनमें से सभी का पहला लक्ष्य एसडीएम का पद होगा, सो स्पर्धा और कठिन होने जा रही है। कुल 677 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में एसडीएम के केवल 22 पद हैं, जबकि सर्वाधिक 114 पद नायब तहसीलदार (एनटी) के हैं।
इसके अलावा डिप्टी एसपी के 90 और बीडीओ के 97 पद हैं। अगर अभ्यर्थियों की मांग मान ली गई होती तो बीडीओ के पद 400 से अधिक हो जाते। अभ्यर्थियों ने शासन को कई बार पत्र भेजकर मांग की थी कि बीडीओ के रिक्त पड़े 370 पदों का अधियाचन प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले आयोग को भेज दिया जाए ताकि इन पदों को भी परीक्षा में शामिल कर लिया जाए। अगर पदों का अधियाचन आ गया होता तो सफल अभ्यर्थियों की संख्या और अधिक होती। फिलहाल आयोग ने 677 पदों के सापेक्ष परिणाम जारी किया है और इनमें 320 पद अनारक्षित श्रेणी के हैं।
एसडीएम, एनटी, डिप्टी एसपी, बीडीओ के अलावा परीक्षा में सीटीओ के 80 पद, एसीटीटी का एक, डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड के चार, जीटीओ/पीटीओ के नौ, टीओ के 47, डीआरएमओ के चार, डीएसओ के दो, सहायक श्रमायुक्त के आठ, अभिहित अधिकारी के दो, कृषि अधिकारी समूह ख के नौ, सांख्यिकीय अधिकारी के पांच, जिला युवा कल्याण एवं विकास दल अधिकारी के पांच, जेल सुप्रिटेंडेंट के चार, डीपीआरओ के 10, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी के 16, जिला उद्यान अधिकारी श्रेणी दो एवं ग्रेड-1 के 15, जिला उद्यान अधिकारी ग्रेड-2 के के छह, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी के 14, कार्य अधिकारी पंचायतीराज का एक, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के दो, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक के आठ, अधिशासी अधिकारी श्रेणी-1 के 18 एवं सहायक जिला रोजगार अधिकारी के 84 पद शामिल हैं।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शुक्रवार को पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 के परिणाम के साथ अंतिम उत्तरकुंजी भी जारी कर दी। इसमें संशोधन के बाद सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में चार अन्य सवालों को भी डिलीट कर दिया गया। इस तरह अब सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्न पत्र में पांच और द्वितीय प्रश्नपत्र में भी पांच सवाल हटा दिए गए हैं। इससे पूर्व आयोग ने 17 नवंबर को उत्तरकुंजी जारी कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगीं थीं। तब आयोग ने सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में एक और सामान्य अध्ययन के द्वितीय प्रश्न पत्र में पांच गलत सवालों को डिलीट कर दिया था। आयोग ने उत्तरकुंजी पर 24 नवंबर तक अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगीं थीं। अभ्यर्थियों ने पांच से छह प्रश्नों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें भी डिलीट किए जाने की मांग की थी। आपत्तियों का निस्तारण करते हुए शुक्रवार को जारी अंतिम उत्तरकुंजी में आयोग ने सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में चार अन्य गलत सवालों को भी हटा दिया है। इस तरह अब प्रथम प्रश्न पत्र से पांच सवाल हटा दिए गए हैं जबकि दूसरे प्रश्नपत्र में आपत्तियों के बाद कोई संशोधन नहीं किया गया है। इसमें पांच सवाल पहले ही डिलीट किए जा चुके थे।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शुक्रवार को राजकीय महाविद्यालयों में प्रवक्ता बीएड के नौ पदों का परिणाम भी घोषित कर दिया। सफल अभ्यर्थियों में एक नाम डॉ. सुहासिनी बाजपेयी का भी है, जिनकी वजह से पीसीएस परीक्षा-2015 विवादों में पड़ गई थी और आयोग की पूरी कार्यप्रणाली पर प्रदेश भर में सवाल उठे थे। डॉ. सुहासिनी बाजपेयी को पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 में असफल घोषित कर दिया गया था, जिसके बार सुहासिनी ने अपनी कॉपी देखने की मांग की थी। बाद में जांच-पड़ताल हुई तो पता चला कि सुहासिनी की कॉपी का कोड नंबर ही बदल दिया गया था। जब सुहासिनी की कॉपी की जांच की गई तो वह मुख्य परीक्षा में सफल घोषित की गईं और उन्हें साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिला। हालांकि, अंतिम रूप से उनका चयन नहीं हो सकता था। आयोग ने शुक्रवार को राजकीय महाविद्यालयों में प्रवक्ता बीएड के नौ पदों के लिए हुई सीधी भर्ती का परिणाम घोषित किया तो इसमें डॉ. सुहासिनी बाजपेयी के साथ शैलजा शर्मा, सुनील कुमार पांडेय, प्रवीण कुमार, सुधांशु कुमार पांडेय, प्रवीन कुमार वर्मौ, ज्ञानेंद्र कुमार, सोमेंद्र सिंह एवं सतीश चंद को अंतिम रूप से चयनित घोषित किया गया। सीधी भर्ती के लिए साक्षात्कार आयोग में इस माह की तीन तारीख को आयोजित किया गया था।
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इसके अलावा डिप्टी एसपी के 90 और बीडीओ के 97 पद हैं। अगर अभ्यर्थियों की मांग मान ली गई होती तो बीडीओ के पद 400 से अधिक हो जाते। अभ्यर्थियों ने शासन को कई बार पत्र भेजकर मांग की थी कि बीडीओ के रिक्त पड़े 370 पदों का अधियाचन प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले आयोग को भेज दिया जाए ताकि इन पदों को भी परीक्षा में शामिल कर लिया जाए। अगर पदों का अधियाचन आ गया होता तो सफल अभ्यर्थियों की संख्या और अधिक होती। फिलहाल आयोग ने 677 पदों के सापेक्ष परिणाम जारी किया है और इनमें 320 पद अनारक्षित श्रेणी के हैं।
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एसडीएम, एनटी, डिप्टी एसपी, बीडीओ के अलावा परीक्षा में सीटीओ के 80 पद, एसीटीटी का एक, डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड के चार, जीटीओ/पीटीओ के नौ, टीओ के 47, डीआरएमओ के चार, डीएसओ के दो, सहायक श्रमायुक्त के आठ, अभिहित अधिकारी के दो, कृषि अधिकारी समूह ख के नौ, सांख्यिकीय अधिकारी के पांच, जिला युवा कल्याण एवं विकास दल अधिकारी के पांच, जेल सुप्रिटेंडेंट के चार, डीपीआरओ के 10, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी के 16, जिला उद्यान अधिकारी श्रेणी दो एवं ग्रेड-1 के 15, जिला उद्यान अधिकारी ग्रेड-2 के के छह, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी के 14, कार्य अधिकारी पंचायतीराज का एक, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के दो, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक के आठ, अधिशासी अधिकारी श्रेणी-1 के 18 एवं सहायक जिला रोजगार अधिकारी के 84 पद शामिल हैं।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शुक्रवार को पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 के परिणाम के साथ अंतिम उत्तरकुंजी भी जारी कर दी। इसमें संशोधन के बाद सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में चार अन्य सवालों को भी डिलीट कर दिया गया। इस तरह अब सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्न पत्र में पांच और द्वितीय प्रश्नपत्र में भी पांच सवाल हटा दिए गए हैं। इससे पूर्व आयोग ने 17 नवंबर को उत्तरकुंजी जारी कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगीं थीं। तब आयोग ने सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में एक और सामान्य अध्ययन के द्वितीय प्रश्न पत्र में पांच गलत सवालों को डिलीट कर दिया था। आयोग ने उत्तरकुंजी पर 24 नवंबर तक अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगीं थीं। अभ्यर्थियों ने पांच से छह प्रश्नों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें भी डिलीट किए जाने की मांग की थी। आपत्तियों का निस्तारण करते हुए शुक्रवार को जारी अंतिम उत्तरकुंजी में आयोग ने सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में चार अन्य गलत सवालों को भी हटा दिया है। इस तरह अब प्रथम प्रश्न पत्र से पांच सवाल हटा दिए गए हैं जबकि दूसरे प्रश्नपत्र में आपत्तियों के बाद कोई संशोधन नहीं किया गया है। इसमें पांच सवाल पहले ही डिलीट किए जा चुके थे।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शुक्रवार को राजकीय महाविद्यालयों में प्रवक्ता बीएड के नौ पदों का परिणाम भी घोषित कर दिया। सफल अभ्यर्थियों में एक नाम डॉ. सुहासिनी बाजपेयी का भी है, जिनकी वजह से पीसीएस परीक्षा-2015 विवादों में पड़ गई थी और आयोग की पूरी कार्यप्रणाली पर प्रदेश भर में सवाल उठे थे। डॉ. सुहासिनी बाजपेयी को पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 में असफल घोषित कर दिया गया था, जिसके बार सुहासिनी ने अपनी कॉपी देखने की मांग की थी। बाद में जांच-पड़ताल हुई तो पता चला कि सुहासिनी की कॉपी का कोड नंबर ही बदल दिया गया था। जब सुहासिनी की कॉपी की जांच की गई तो वह मुख्य परीक्षा में सफल घोषित की गईं और उन्हें साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिला। हालांकि, अंतिम रूप से उनका चयन नहीं हो सकता था। आयोग ने शुक्रवार को राजकीय महाविद्यालयों में प्रवक्ता बीएड के नौ पदों के लिए हुई सीधी भर्ती का परिणाम घोषित किया तो इसमें डॉ. सुहासिनी बाजपेयी के साथ शैलजा शर्मा, सुनील कुमार पांडेय, प्रवीण कुमार, सुधांशु कुमार पांडेय, प्रवीन कुमार वर्मौ, ज्ञानेंद्र कुमार, सोमेंद्र सिंह एवं सतीश चंद को अंतिम रूप से चयनित घोषित किया गया। सीधी भर्ती के लिए साक्षात्कार आयोग में इस माह की तीन तारीख को आयोजित किया गया था।