One More Time : जिंदगी रही तो फिर से दे सकते हैं परीक्षा, वेब सीरीज के माध्यम छात्रों में जगाई उम्मीद
नीट पेपर लीक प्रकरण से देशभर के लाखों छात्रों की उम्मीदों को झटका लगा था। ऐसे समय में संगमनगरी की बेटी और मुंबई में सक्रिय अभिनेत्री व फिल्मकार अमृषा गौतम ने विरोध के बजाय कैमरे को अपनी आवाज बनाया।
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नीट पेपर लीक प्रकरण से देशभर के लाखों छात्रों की उम्मीदों को झटका लगा था। ऐसे समय में संगमनगरी की बेटी और मुंबई में सक्रिय अभिनेत्री व फिल्मकार अमृषा गौतम ने विरोध के बजाय कैमरे को अपनी आवाज बनाया। उन्होंने छात्रों को निराशा से बाहर निकालने और दोबारा संघर्ष के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सात एपिसोड की वेब सीरीज वन मोर टाइम बनाई। वेब सीरीज पर फिल्मकार अमृषा ने खुलकर अपनी बात रखी।
सवाल : नीट पेपर लीक मामले पर वेब सीरीज बनाने का विचार कैसे आया?
जब नीट का पेपर रद्द हुआ तो मैंने अपने भाई-बहनों को रोते देखा। उन्होंने लोगों से बात करना तक बंद कर दिया था। जब कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि पूरे साल की मेहनत एक झटके में बेकार हो गई। परीक्षा अच्छी हुई थी लेकिन पेपर लीक की खबर ने उन्हें तोड़ दिया। लगा कि विद्यार्थियों की इस पीड़ा और संघर्ष को सामने लाना जरूरी है। इसी सोच से वन मोर टाइम की शुरुआत हुई।
सवाल : क्राउडफंडिंग के जरिये इस प्रोजेक्ट को पूरा करना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
शुरुआत में मेरे पास कुछ बचत थी। इसके अलावा दोस्तों ने भी सहयोग किया। मेरा मानना है कि जब आप किसी अच्छे उद्देश्य के लिए पूरी ईमानदारी से काम करते हैं तो मदद अपने आप मिलती जाती है। इसी सहयोग से यह प्रोजेक्ट पूरा हो सका।
सवाल : वेब सीरीज के कलाकारों का चयन कैसे किया गया?
मुंबई में कलाकारों का ऑडिशन कराया गया। इसके बाद कहानी और पात्रों की जरूरत के अनुसार कलाकारों का चयन किया गया। हमने कोशिश की कि हर किरदार वास्तविक लगे और छात्रों की भावनाओं को सही तरीके से पेश कर सके।
सवाल : इस वेब सीरीज को लेकर छात्रों से कैसी प्रतिक्रिया मिली?
प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक रही है। छात्र मृदुल ने कहा कि ‘वन मोर टाइम’ का संदेश किसी भी विद्यार्थी को सदमे और निराशा से बाहर निकाल सकता है। कई छात्रों ने बताया कि यह सीरीज उन्हें दोबारा मेहनत करने और उम्मीद बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
सवाल : जब लाखों छात्र निराश थे, तब आपने विरोध के बजाय कैमरे के जरिये अपनी बात रखने का फैसला क्यों किया?
उस समय बहुत लोग सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे थे लेकिन वह चर्चा कुछ समय बाद खत्म हो जाती है। मैं ऐसा माध्यम चुनना चाहती थी जो लंबे समय तक लोगों तक पहुंचे। इस वजह से वेब सीरीज बनाई। मेरा संदेश साफ है कि परीक्षा दोबारा दी जा सकती है लेकिन जिंदगी दोबारा नहीं मिलती। किसी भी असफलता या झटके के बाद उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
प्रयागराज से मुंबई तक का सफर
धूमनगंज के मीरापट्टी क्षेत्र की रहने वाली अमृषा गौतम की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से हुई। उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद थिएटर की दुनिया में कदम रखा। वर्ष 2018 में उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित बायोपिक में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद वह मुंबई में सक्रिय हो गईं।
सात एपिसोड की है ‘वन मोर टाइम’
अमृषा ने बताया कि ‘वन मोर टाइम’ सात एपिसोड की वेब सीरीज है। इसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में मयंक और निखिल ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। छोटी बहन और नानी ने हमेशा उत्साह बढ़ाया।