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स्लीपरों की खरीदारी में हुआ एक सेंटीमीटर खेल, 12 लाख रुपये की सीधे लगाई गई चपत

Sun, 04 Oct 2020 04:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 04 Oct 2020 04:10 PM IST
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One centimeter game in the purchase of sleepers, 12 lakh rupees directly
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कुंभ मेला 2018-19 में पंजाब राज्य वन विकास निगम लिमिटेड से मंगाए गए स्लीपर की मोटाई निर्धारित मानक से एक सेंटीमीटर कम पाई गई है। इससे कुंभ के बजट से सीधे 12 लाख रुपये से अधिक की चपत लगाई गई है। कुंभ के दौरान पंजाब वन विकास निगम से 86 सौ से अधिक स्लीपर जो कि 118 करोड़ रुपये से 1000 घनमीटर मंगाए गए थे। 
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मानक के मुताबिक एक स्लीपर की लंबाई 4.25 मीटर, चौड़ाई 0.20 मीटर और उंचाईं 0.13 मीटर होनी चाहिए। इसका कुल आयतन 0.1105 घन मीटर होता है। एक स्लीपर की कीमत निर्धारित रेट के मुताबिक 15406 रुपये आंकी गई थी। लेकिन पंजाब से जो स्लीपर आया उसकी मोटाई या ऊंचाई निर्धारित मानक से एक सेंटीमीटर कम पाए जाने की बात सामने आ रही है।
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक एक सेंटीमीटर की मोटाई कम होने से प्रति स्लीपर 139 रुपये की चपत लगाई गई। यदि एक हजार घन मीटर या मंगाए गए कुल 8695 स्लीपर को जोेड़ा जाए 1280605 रुपये का सीधा घपला एक ही मामले में किया गया। मंगाए गए स्लीपर आज भी मेला स्टोर रूम में पड़े हैं, जिसकी नापजोख होनी बाकी है। कुछ स्लीपरों को रिजेक्ट किए जाने की जरूरत थी लेकिन उसे भी शामिल कर दिया गया। ये सब विभागीय अफसरों की आपसी साठगांठ से किया गया। इन सारे एंगल पर अधीक्षण अभियंता एमके सिंह द्वारा जांच कराई जा रही है। 
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ढुलाई में अधिक जीएसटी देने की बात आ रही सामने

पंजाब वन विकास निगम की ओर से मंगाए गए स्लीपर में जीएसटी भी अधिक देने की बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि नियम के मुताबिक इस पर पांच फीसदी ही जीएसटी लगाया जाना चाहिए था, लेकिन 18 फीसदी जीएसटी दिया गया। क्योंकि, कुंभ में आने वाला स्लीपर सार्वजनिक उपयोग से जुड़ा हुआ सरकारी सामान था। उस हिसाब से पांच फीसदी जीएसटी के मुताबिक नौ लाख, 27 हजार, 18 रुपये ही बनता है लेकिन इसके लिए 33 लाख, 37 हजार, 267 रुपये अधिक जीएसटी दिया गया। अब यह अधिक जीएसटी सरकारी खाते में पहुंची या नहीं यह तो जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन, मामले में जितनी परत उधेड़ी जाए उतनी ही घोटाले की पोल खुलती जा रही है।
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