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Prayagraj Nagar Nigam : एक बार फिर किसी को बहुमत के आसार नहीं, निर्दलियों की बढ़ेगी भूमिका

Sun, 07 May 2023 01:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 07 May 2023 01:51 PM IST
सार

पिछले चुनाव में भाजपा के 22 पार्षद निर्वाचित हुए थे, तो करीब तीन दर्जन सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही। भाजपा इसी प्रदर्शन तथा मुस्लिम मतों के बिखराव के आधार पर 50 से अधिक वार्ड में जीत का दावा कर रही है, लेकिन ओमप्रकाश सभासद, झूलेलाल नगर, नैनी भदरी समेत कई वार्डों में भाजपा को अपने ही लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

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Once again no one is expected to get majority, role of independents will increase
Prayagraj News : नगर निगम प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सदन में महापौर के चुनाव में उम्मीदवारों के सामने चुनौती बढ़ती दिख रही है। पिछली बार की तरह इस बार भी किसी दल के 50 से अधिक पार्षद चुने जाने की उम्मीद कम है। ऐसे में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका बढ़ती दिख रही है। 2017 के चुनाव में सपा के सबसे अधिक 24 पार्षद चुने गए थे। ज्यादा पार्षद मुस्लिम बहुल वार्ड से निर्वाचित हुए थे। सपा ने इस बार भी उन पर दांव लगाया है। इनके अलावा 20 से अधिक वार्ड में सपा दूसरे स्थान पर रही। खास बात यह है कि मुस्लिमों में अखिलेश यादव के प्रति नाराजगी दिखी और उसका असर महापौर के चुनाव में देखने को मिल सकता है।

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हालांकि, अतहर रजा, आजम, नेम यादव, पुलकित यादव समेत सपा के कई पार्षदों पर मतदाताओं का भरोसा अब भी बना हुआ है। इसके अलावा सपा को विस्तारित क्षेत्र, खासतौर पर गंगापार की 15 सीटों पर भी भरोसा है। ऐसे में मुस्लिमों की नाराजगी के बावजूद इस बार भी सपा के सबसे अधिक पार्षद सदन में पहुंचते हैं तो अचरज नहीं होगा, लेकिन 50 पार्षदों का आंकड़ा दूर दिख रहा है।

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पिछले चुनाव में भाजपा के 22 पार्षद निर्वाचित हुए थे, तो करीब तीन दर्जन सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही। भाजपा इसी प्रदर्शन तथा मुस्लिम मतों के बिखराव के आधार पर 50 से अधिक वार्ड में जीत का दावा कर रही है, लेकिन ओमप्रकाश सभासद, झूलेलाल नगर, नैनी भदरी समेत कई वार्डों में भाजपा को अपने ही लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में भाजपा का यह दावा कितना सच हो पाएगा यह 13 मई को ही पता चलेगा।

कांग्रेस को मिल सकता है सपा से जनता की नाराजकी का फायदा

 

पिछली बार कांग्रेस के 11 पार्षद चुने गए थे और संख्या बल के हिसाब से वह तीसरे स्थान पर रही। इनमें से नौ निवर्तमान पार्षदों या उनके परिजनों को कांग्रेस ने दोबारा मैदान में उतारा है। मुकुंद तिवारी की पत्नी, तसलिमुद्दीन, मुमताज, नफीस अनवर समेत कई इस बार भी मुख्य लड़ाई में हैं। इसके अलावा कांग्रेस को मुस्लिमों की सपा से नाराजगी का भी कुछ फायदा हो सकता है, लेकिन 50 पार्षदों का आंकड़ा कांग्रेस से भी दूर ही दिखाई दे रहा है। यही स्थिति पिछले चुनाव में तीन वार्ड में जीत हासिल करने वाली बसपा की भी दिख रही है।

इसके विपरीत पिछले चुनाव में कमलेश सिंह, आनंद घिल्डियाल, अखिलेश सिंह, अमरजीत यादव, दिलीप कुमार, रमेश मिश्र, शिवकुमार, जयेंद्र कुमार समेत 18 निर्दलीय पार्षद चुनकर सदन में पहुंचे थे। इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे थे। इनमें से ज्यादातर इस बाद भी मैदान में हैं और मुख्य मुकाबले में हैं। ऐसे में इस बार भी सदन में निर्दलीयों की भूमिका बढ़ती दिख रही है।

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