Fraud : महादेव एप की तर्ज पर करोड़ों की ठगी के सरगना ने छोड़ा छत्तीसगढ़, झारखंड में मिली लोकेशन
11 जून को इस खेल का भंडाफोड़ करते हुए नैनी पुलिस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से नकदी, पांच लैपटॉप, 42 मोबाइल व अन्य सामान बरामद हुआ था। बाद में दो और सदस्यों को पकड़ा गया। जांच व गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई कि छत्तीसगढ़ निवासी राहुल साव इस गिरोह का सरगना है।
विस्तार
महादेव एप की तर्ज पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का सरगना छत्तीसगढ़ छोड़कर भाग निकला है। पुलिस टीम वहां पहुंची तो उसके घर पर ताला लगा मिला। इस बात के भी इनपुट मिले हैं कि वह झारखंड भी भाग सकता है। ऐसे में फिलहाल उसके मददगारों की जानकारी जुटाई जाने लगी है। 11 जून को इस खेल का भंडाफोड़ करते हुए नैनी पुलिस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से नकदी, पांच लैपटॉप, 42 मोबाइल व अन्य सामान बरामद हुआ था।
बाद में दो और सदस्यों को पकड़ा गया। जांच व गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई कि छत्तीसगढ़ निवासी राहुल साव इस गिरोह का सरगना है। उसके तार महादेव एप के धंधेबाजों से जुड़े हैं और वह बिहार के अरेराज पटना, जनपद गोपालगंज के भितभेरवा ग्राम थाना नगर, यूपी के महाराजगंज के बभनी खुर्द थाना कोलही और कोलकाता के आसनसोल में भी मिनी काॅल सेंटर खोलकर यह खेल संचालित कर रहा था। इस जानकारी के आधार पर उसकी तलाश में नैनी पुलिस की एक टीम लगाई गई थी। उसकी तलाश करते हुए नैनी पुलिस छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित घर पर पहुंची तो राहुल वहां नहीं मिला।
पता चला कि 11 जून को ही उसने घर छोड़ दिया। पुलिस ने उसके कई संभावित ठिकानों पर छापामारा, लेकिन वह नहीं मिला। सूत्रों के मुताबिक यह पता चला है कि वह छत्तीसगढ़ छोड़कर झारखंड भाग निकला है। दरअसल, झारखंड में वह पहले काफी समय तक रहा है और उसके कई परिचित वहां रहते हैं। नैनी प्रभारी यशपाल सिंह ने बताया कि टीमें लगाई गई हैं। उसके हर संभावित ठिकाने पर दबिश दी जा रही है।
पैनल लेकर राहुल संचालित कर रहा था गिरोह
सूत्रों के मुताबिक पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि राहुल साव किसी बेटिंग एप से पैनल लेकर इस पूरे खेल को कई शहरों में संचालित कर रहा था। इसमें एप कंपनी और उसके बीच 70:30 की प्रॉफिट डील की बात तय हुई थी। अपना प्रॉफिट निकालकर वह अलग-अलग शहरों में चल रहे अपने मिनी सेंटरों पर यूजरों से जमा की गई राशि को बेटिंग एप के मालिकों तक पहुंचाता था। यह पैसा भी सीधे न जाकर पहले डिजिटल करंसी में एक्सचेंज कराया जाता था और फिर ट्रांसफर किया जाता था।