{"_id":"58b9cc5e4f1c1bec458310c7","slug":"on-receipt-of-the-statue-of-lord-parshwanath-active-ivivi","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा मिलने पर इविवि सक्रिय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा मिलने पर इविवि सक्रिय
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 04 Mar 2017 01:45 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कौशाम्बी के कोसम ईनाम गांव के नजदीक यमुना नदी में भगवान पार्श्वनाथ की 1200 साल पुरानी प्रतिमा मिलने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ सक्रिय हो गए हैं। क्षेत्र में पुरातात्विक महत्व वाले कई अन्य अवशेष मिलने की उम्मीद है। इसी के अध्ययन के लिए प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यापकाें और शोधार्थियों का दल गांव जाएगा।
बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने नदी में प्रतिमा देखी। तकरीबन चार क्विंटल वजन की प्रतिमा चार फीट लंबी तथा तीन फीट चौड़ी है। महावीर मंदिर के पुजारी दिनेश चंद्र जैन की सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। मूर्ति को मंदिर के पास सुरक्षित रखवा दिया गया है। मूर्ति मिलने की जानकारी बीएचयू के प्रोफेसर एके द्विवेदी और डॉ.अर्पिता चटर्जी को दी गई। व्हाट्सअप पर भेजे गए फोटोग्राफ्स के आधार पर उन्होंने बताया कि जैन धर्म के 23वें तीर्थंगर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा है। उनके अनुसार यह प्रतिमा आठवीं शताब्दी की है। प्रोफेसर एके द्विवेदी का कहना है कि कौशाम्बी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर स्वामी की तपोस्थली रही। भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा मिलने से इसकी पुष्टि होती है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेएन पाल, प्रोफेसर एचएन दुबे का कहना है कि क्षेत्र में पार्श्वनाथ की प्रतिमा मिलना ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। कौशाम्बी बौद्ध और जैन दोनों धर्मों का केंद्र रहा है। उस क्षेत्र में पुरातात्वि महत्व वाले कई अन्य अवशेष मिलने की उम्मीद है। प्रोफेसर जेएन पाल ने बताया कि मूर्ति के साथ पूरे क्षेत्र का अध्ययन किया जाएगा।
विज्ञापन
डीएम अखंड प्रताप सिंह का कहना है भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को सुरक्षित रखा गया है। कोसम ईनाम गांव ऐतिहासिक स्थल है। यह गांव पुरातत्व विभाग के नियंत्रण में है। प्रतिमा जल्द ही पुरातत्व विभाग को सुपुर्द की जाएगी। डीएम का कहना है कि कोशिश होगी कि प्रतिमा कौशाम्बी की वीथि में रखवाई जाए।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने नदी में प्रतिमा देखी। तकरीबन चार क्विंटल वजन की प्रतिमा चार फीट लंबी तथा तीन फीट चौड़ी है। महावीर मंदिर के पुजारी दिनेश चंद्र जैन की सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। मूर्ति को मंदिर के पास सुरक्षित रखवा दिया गया है। मूर्ति मिलने की जानकारी बीएचयू के प्रोफेसर एके द्विवेदी और डॉ.अर्पिता चटर्जी को दी गई। व्हाट्सअप पर भेजे गए फोटोग्राफ्स के आधार पर उन्होंने बताया कि जैन धर्म के 23वें तीर्थंगर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा है। उनके अनुसार यह प्रतिमा आठवीं शताब्दी की है। प्रोफेसर एके द्विवेदी का कहना है कि कौशाम्बी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर स्वामी की तपोस्थली रही। भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा मिलने से इसकी पुष्टि होती है।
विज्ञापन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेएन पाल, प्रोफेसर एचएन दुबे का कहना है कि क्षेत्र में पार्श्वनाथ की प्रतिमा मिलना ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। कौशाम्बी बौद्ध और जैन दोनों धर्मों का केंद्र रहा है। उस क्षेत्र में पुरातात्वि महत्व वाले कई अन्य अवशेष मिलने की उम्मीद है। प्रोफेसर जेएन पाल ने बताया कि मूर्ति के साथ पूरे क्षेत्र का अध्ययन किया जाएगा।
विज्ञापन
डीएम अखंड प्रताप सिंह का कहना है भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को सुरक्षित रखा गया है। कोसम ईनाम गांव ऐतिहासिक स्थल है। यह गांव पुरातत्व विभाग के नियंत्रण में है। प्रतिमा जल्द ही पुरातत्व विभाग को सुपुर्द की जाएगी। डीएम का कहना है कि कोशिश होगी कि प्रतिमा कौशाम्बी की वीथि में रखवाई जाए।