{"_id":"5d014ff9bdec22078f24ebc8","slug":"now-pick-up-fresh-beer-like-coffee","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब उठाइए कॉफी की तरह ताजा बीयर का भी लुत्फ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब उठाइए कॉफी की तरह ताजा बीयर का भी लुत्फ
Thu, 13 Jun 2019 01:00 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 13 Jun 2019 01:00 AM IST
विज्ञापन
beer
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीयर के शौकीन अब कॉफी की तरह ही सामने बनी ताजी बीयर का लुफ्त उठा सकेंगे। इसकी खूबी यह है कि पसंद के मुताबिक इसे स्ट्रांग या लाइट बनाया जा सकता है। फ्लेवर भी मनचाहा मिलेगा। यूपी सरकार के माइक्रो बेवरीज को लाइसेंस देने की मंजूरी के बाद अब बार संचालक अपने यहां इस तरह की क्राफ्ट बीयर तैयार करके उसे ग्राहक को परोस सकते हैं। प्रयागराज में 12 बार संचालक इसका लाइसेंस लेने की पात्रता रखते हैं।
दिल्ली, गोवा, मुंबई, गुडगांव जैसे शहरों में इस तरह की क्राफ्ट बीयर का जबर्दस्त क्रेज है। शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय होने के बावजूद यह यूपी में नहीं मिलती थी। दो दिन पहले हुई कैबिनेट बैठक में आबकारी विभाग के प्रस्ताव को मंजूर करके इसका रास्ता खोल दिया गया। अब इसे तैयार करने वाली माइक्रो ब्रेवरीज यहां खोली जा सकेंगी। यह पूरे यूपी में कहीं भी खोली जा सकेंगी। शुरूआत में 50 हजार रुपये शुल्क के साथ मंजूरी मिलने पर दो लाख रुपये सलाना लाइसेंस फीस चुकानी होगी।
माइक्रो ब्रेवरी में बनी क्राफ्ट बीयर में अधिकतम 8 फीसदी ही एल्कोहल होगी, जिसे अधिकतम 24 घंटे तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। 24 घंटे के बाद इस बीयर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। आबकारी अधिकारियों के मुताबिक अभी लाइसेंस सिर्फ बार संचालकों को ही दिया जाएगा। प्रयागराज में 12 प्रतिष्ठानोें के पास बार चलाने के लाइसेंस हैं। इनमें होटल भी शामिल हैं हालांकि माइक्रो ब्रेवरी लगाने में करीब डेढ़ करोड़ रूपये तक का खर्च भी है। तकनीकी अधिकारी सभाजीत वर्मा के मुताबिक मंजूरी मिलने के साथ ही इसकी प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
विज्ञापन
क्राफ्ट बीयर में जौ के अलावा ताजे फलों का इस्तेमाल होता है। दर्जनों फ्लेवरों के साथ इसे बनाया जा सकता है। ताजे फल एवं दूसरे फ्लेवर मिलाकर उसके स्वाद में आसानी से फेरबदल भी हो सकता है। अमूमन बीयर छह माह से एक साल तक पुरानी हो जाती है। उसमें कार्बन डाइ आक्साइड जैसे घातक रसायन भी मिलाए जाते हैं जबकि क्राफ्ट बीयर अधिकतम 24 घंटे ही पुरानी होती है। ताजी होने के साथ पसंदीदा फ्लेवर के साथ बनाए जाने से यह लोगों के बीच खासी लोकप्रिय है।
विज्ञापन
दिल्ली, गोवा, मुंबई, गुडगांव जैसे शहरों में इस तरह की क्राफ्ट बीयर का जबर्दस्त क्रेज है। शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय होने के बावजूद यह यूपी में नहीं मिलती थी। दो दिन पहले हुई कैबिनेट बैठक में आबकारी विभाग के प्रस्ताव को मंजूर करके इसका रास्ता खोल दिया गया। अब इसे तैयार करने वाली माइक्रो ब्रेवरीज यहां खोली जा सकेंगी। यह पूरे यूपी में कहीं भी खोली जा सकेंगी। शुरूआत में 50 हजार रुपये शुल्क के साथ मंजूरी मिलने पर दो लाख रुपये सलाना लाइसेंस फीस चुकानी होगी।
विज्ञापन
माइक्रो ब्रेवरी में बनी क्राफ्ट बीयर में अधिकतम 8 फीसदी ही एल्कोहल होगी, जिसे अधिकतम 24 घंटे तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। 24 घंटे के बाद इस बीयर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। आबकारी अधिकारियों के मुताबिक अभी लाइसेंस सिर्फ बार संचालकों को ही दिया जाएगा। प्रयागराज में 12 प्रतिष्ठानोें के पास बार चलाने के लाइसेंस हैं। इनमें होटल भी शामिल हैं हालांकि माइक्रो ब्रेवरी लगाने में करीब डेढ़ करोड़ रूपये तक का खर्च भी है। तकनीकी अधिकारी सभाजीत वर्मा के मुताबिक मंजूरी मिलने के साथ ही इसकी प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
विज्ञापन
क्राफ्ट बीयर में जौ के अलावा ताजे फलों का इस्तेमाल होता है। दर्जनों फ्लेवरों के साथ इसे बनाया जा सकता है। ताजे फल एवं दूसरे फ्लेवर मिलाकर उसके स्वाद में आसानी से फेरबदल भी हो सकता है। अमूमन बीयर छह माह से एक साल तक पुरानी हो जाती है। उसमें कार्बन डाइ आक्साइड जैसे घातक रसायन भी मिलाए जाते हैं जबकि क्राफ्ट बीयर अधिकतम 24 घंटे ही पुरानी होती है। ताजी होने के साथ पसंदीदा फ्लेवर के साथ बनाए जाने से यह लोगों के बीच खासी लोकप्रिय है।