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इंस्पेक्टर के ट्रांसफर पर एडीजी सहित कई अफसरों को नोटिस

Thu, 16 Jul 2020 07:47 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 16 Jul 2020 07:47 PM IST
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Notice to many officers including ADG on transfer of inspector
court - फोटो : prayagraj
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के सेक्टर 20 में तैनात रहे  पुलिस इंस्पेक्टर मनोज पंत का स्थानांतरण नोएडा से नहीं करने के आदेश के बावजूद उनको गोरखपुर मंडल में स्थानांतरण करने के पुलिस अधिकारियों के निर्णय को प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला माना है।
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हालांकि कोर्ट ने अधिकारियों को गलती सुधार कर हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का एक और अवसर दिया है। मनोज पंत ने इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल की है।
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जिस पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की पीठ ने  एडीजी स्थापना पीयूष आनंद,  पुलिस कमिश्नर नोएडा आलोक  सिंह,  एडिशनल पुलिस कमिश्नर नीतिन तिवारी, व तत्कालीन एसएस पी नोएडा को अवमानना का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए  आदेश का अनुपालन करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। 
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 याची के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने कोर्ट को बताया कि याची को कुछ पत्रकारों के साथ मिलकर आठ लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की तो हाईकोर्ट ने निलंबन पर रोक लगाते हुए कहा कि विभागीय जांच जारी रहने तक याची को नोएडा में ही तैनात रखा जाए।

इस आदेश का पालन नहीं किया गया और याची का स्थानांतरण गोरखपुर मंडल कर दिया गया। इसके खिलाफ उसने अवमानना याचिका दाखिल की थी जिस पर  हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2019 को  सभी अधिकारियों को दो माह का समय आदेश पालन करने  का दिया था ।

परन्तु अधिकारियों ने आदेश का पालन  न कर कहा कि याची  का तबादला नोएडा से गोरखपुर कर दिया गया है तथा उसे नोएडा से कार्यमुक्त भी कर दिया गया है,  इस कारण अब उसे नोएडा ( गौतमबुद्ध नगर ) में पोस्टिंग  नहीं दी जा सकती ।

इसके खिलाफ दुबारा अवमानना याचिका दाखिल की गई है जिस पर कोर्ट ने छह सप्ताह का समय फिर से दिया है कि याची को गोरखपुर से हटाकर नोएडा में तैनात रखने के आदेश का पालन किया जाए। 


मामले के अनुसार मनोज पंत व कुछ इलेक्ट्रानिक व प्रिन्ट मीडिया के लोगों के खिलाफ जनवरी 2019 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत  थाना सेक्टर- 20 नोएडा में मुकदमा कायम हुआ । मनोज पंत इसी थाने के इंस्पेक्टर भी थे।  रिश्वत लेने के आरोप में याची इंस्पेक्टर व पत्रकारों को जेल भेज दिया गया । बाद में एस एस पी ने याची को निलंबित कर दिया था । हाईकोर्ट ने याची के निलंबन पर रोक लगाते हुए आदेश दिया कि उसे नोएडा में तैनात रखा जाए मगर इस आदेश का पालन नहीं किया गया।
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