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गैर राज्य की महिला अभ्यर्थी को आरक्ष्एण न देने पर जवाब तलब
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Non-state women candidates summoned for non-reservation
प्रयागराज। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने गैर राज्य की महिला अभ्यर्थी को कांस्टेबल भर्ती में 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ नहीं देने पर पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब मांगा है। कोर्ट ने अपर सचिव भर्ती बोर्ड को याची के दावे पर विचार करने और रिक्त पदों की स्थिति से अवगत कराने के लिए कहा है। मध्यप्रदेश की कंचन शर्मा की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची ने 2018 की कांस्टेबल भर्ती में आवेदन किया था। सभी चरणों की परीक्षा में वह सफल रही। शारीरिक दक्षता परीक्षा और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद अंतिम चयन सूची जारी की गई, जिसमें याची का नाम नहीं था। भर्ती बोर्ड ने बताया कि याची के गैर राज्य की निवासी होने के कारण याची को 20 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। यह लाभ सिर्फ उत्तर प्रदेश की मूल निवासी अभ्यर्थियों के लिए ही है।
अधिक्वक्ता का तर्क था कहना था कि आरक्षण देने में निवास स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। ऐसा करना अनुच्छेद 16(2) और अनुच्छेद 16(3) उल्लंघन होगा, जिसके अनुसार जन्म स्थान और लिंग के आधार भेद भाव नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने याची की नियुक्ति पर विचार करने और रिक्त पदों की स्थिति बताते हुए पुलिस भर्ती बोर्ड को हलफनामा दाखिल करने का निदेश दिया है।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची ने 2018 की कांस्टेबल भर्ती में आवेदन किया था। सभी चरणों की परीक्षा में वह सफल रही। शारीरिक दक्षता परीक्षा और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद अंतिम चयन सूची जारी की गई, जिसमें याची का नाम नहीं था। भर्ती बोर्ड ने बताया कि याची के गैर राज्य की निवासी होने के कारण याची को 20 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। यह लाभ सिर्फ उत्तर प्रदेश की मूल निवासी अभ्यर्थियों के लिए ही है।
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अधिक्वक्ता का तर्क था कहना था कि आरक्षण देने में निवास स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। ऐसा करना अनुच्छेद 16(2) और अनुच्छेद 16(3) उल्लंघन होगा, जिसके अनुसार जन्म स्थान और लिंग के आधार भेद भाव नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने याची की नियुक्ति पर विचार करने और रिक्त पदों की स्थिति बताते हुए पुलिस भर्ती बोर्ड को हलफनामा दाखिल करने का निदेश दिया है।
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