हाईकोर्ट : नामिनी बैंक में जमा धन का हकदार, लेकिन पैसा उत्तराधिकार कानूनों के अधीन
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा को तीन सप्ताह के भीतर याची को सशर्त जमा धन राशि जारी करने का आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक खाते में जमा धन पर नामिनी का हक है, लेकिन प्राप्त धन उत्तराधिकार कानूनों के अधीन होगा। मृतक के उत्तराधिकारियों को जमा राशि पर अधिकार होगा। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा को तीन सप्ताह के भीतर याची को सशर्त जमा धन राशि जारी करने का आदेश दिया है।
मुरादाबाद निवासी मनोज कुमार शर्मा ने अपनी मां की मौत के बाद नामिनी और उत्तराधिकार का दावा करते हुए अपने पक्ष में रुपये जारी करने की मांग की। जबकि उसकी मां की कथित वसीयत को रद्द करने के लिए एक मुकदमा ट्रायल कोर्ट में लंबित है।
याची के वकील ने दलील दी कि नामिनी को बैंक से धन प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन उत्तराधिकार के कानूनों को खारिज नहीं किया जा सकता है। कहा कि उत्तराधिकारियों के लिए ट्रस्ट के रूप में नामिनी को रुपये रखने होंगे।
न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद निर्देश दिया कि याची बैंक ऑफ बड़ौदा के समक्ष इस आशय का हलफनामा दायर करे कि जो पैसा उसे मिल रहा है, उसे वह ट्रस्ट में रखा है। निर्णय होने पर कानूनी उत्तराधिकारियों को इसका भुगतान करेगा।