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कोरोना के डर से संगम सूना, तीर्थपुरोहितों की चौकियां खाली
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no tourist in sagam due to corona
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। कोरोना वायरस के डर ने जग विख्यात तीर्थ त्रिवेणी संगम को भी सूना कर दिया है। मंगलवार को वायरस के खौफ का असर स्नान, दान, ध्यान और अनुष्ठानों पर भी पड़ गया। संगम पर डुबकी लगाने वालों की संख्या अचानक इस तरह घट गई कि तीर्थपुरोहितों की चौकियां सूनी हो गईं। नौकाएं भी खड़ी रहीं और संगम की रेती पर कैमल सफारी का आनंद उठाने वालों का भी टोटा पड़ गया।
वासंतिक नवरात्र से पहले संगम पर श्रद्धालुओं की संख्या में आई भारी गिरावट को कोरोना वायरस के डर से जोड़ कर देखा जा रहा है। मंगलवार को अचानक डुबकी लगाने वालों की तादाद न के बराबर हो गई। इससे तीर्थपुरोहितों की चौकियां दिन भर खाली रहीं। पंडों की चौकियों पर रोज जहां संकल्प लेने और तिलक-त्रिपुंड लगाने वालों की भीड़ लगी रहती थी, वहीं इस दिन सन्नाटे का आलम रहा। पुरोहित सोहनलाल ने बताया कि दो दिन से संगम पर स्नानार्थियों की संख्या पहले से ही घट रही थी, लेकिन मंगलवार को तो सन्नाटा छाया रहा। इसी तरह तीर्थपुरोहित घंटी गुरु के मुताबिक बाहरी तीर्थयात्री न के बराबर आ रहे हैं। पहले दर्जन भर से अधिक बसें किसी न किसी इलाके से आ ही जाती थीं, लेकिन अब लोग संगम पर समूहों में आने और नहाने से बच रहे हैं।
पूजा-प्रसाद और दीया बेचने वाली फूलकली, नेहा समेत कई छोटे दुकानदार भी संगम तट पर दर्शनार्थियों की राह देखते रहे। दर्जनों दुकानें तो पर्दे से ढंक दी गई थीं। इसी तर नौका संचालन भी लड़खड़ा गया है। वीआईपी किला घाट के अलावा संगम और अरैल घाटों पर इक्का-दुक्का ही नावें खुलती रहीं। बाकी नावों के लंगर बंधे ही रह गए। ऊंटपालक प्रतापगढ़ के मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पहले जहां बच्चों, महिलाओं को कैमल सफारी के लिए भीड़ रहती थी, वहीं अब कोरोना वायरस के चलते लोग नहीं आ रहे हैं।
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वासंतिक नवरात्र से पहले संगम पर श्रद्धालुओं की संख्या में आई भारी गिरावट को कोरोना वायरस के डर से जोड़ कर देखा जा रहा है। मंगलवार को अचानक डुबकी लगाने वालों की तादाद न के बराबर हो गई। इससे तीर्थपुरोहितों की चौकियां दिन भर खाली रहीं। पंडों की चौकियों पर रोज जहां संकल्प लेने और तिलक-त्रिपुंड लगाने वालों की भीड़ लगी रहती थी, वहीं इस दिन सन्नाटे का आलम रहा। पुरोहित सोहनलाल ने बताया कि दो दिन से संगम पर स्नानार्थियों की संख्या पहले से ही घट रही थी, लेकिन मंगलवार को तो सन्नाटा छाया रहा। इसी तरह तीर्थपुरोहित घंटी गुरु के मुताबिक बाहरी तीर्थयात्री न के बराबर आ रहे हैं। पहले दर्जन भर से अधिक बसें किसी न किसी इलाके से आ ही जाती थीं, लेकिन अब लोग संगम पर समूहों में आने और नहाने से बच रहे हैं।
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पूजा-प्रसाद और दीया बेचने वाली फूलकली, नेहा समेत कई छोटे दुकानदार भी संगम तट पर दर्शनार्थियों की राह देखते रहे। दर्जनों दुकानें तो पर्दे से ढंक दी गई थीं। इसी तर नौका संचालन भी लड़खड़ा गया है। वीआईपी किला घाट के अलावा संगम और अरैल घाटों पर इक्का-दुक्का ही नावें खुलती रहीं। बाकी नावों के लंगर बंधे ही रह गए। ऊंटपालक प्रतापगढ़ के मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पहले जहां बच्चों, महिलाओं को कैमल सफारी के लिए भीड़ रहती थी, वहीं अब कोरोना वायरस के चलते लोग नहीं आ रहे हैं।
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