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Prayagraj News: कोई नाता न रिश्तेदारी... सेवाभाव से निभा रहीं जिम्मेदारी
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सुभा सिंह
- फोटो : Samvad
मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) में बीते पांच साल से नर्सों की कमी बनी हुई है। बावजूद इसके 33 स्टाफ नर्स 230 बेड के अस्पताल में पूरी शिद्दत से अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। मरीजों के सुख-दुख में शरीक होती हैं। उन्हें मायूस नहीं होने देती हैं।
कॉल्विन में मानकों के आधार पर 111 नर्सों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन अस्पताल सिर्फ 33 स्टाफ नर्सों के भरोसे चल रहा है। ऐसे में उनपर काम का दबाव रहता है। इसके बाद भी वह मरीजों को अपना मानकर दिन-रात सेवा करती हैं। उन्हें जांच से लेकर उपचार तक सब मुहैया कराती हैं।
इनसेट
संगीत से दूर करती हैं थकान
भावापुर निवासी शुभा सिंह वर्ष 1999 से कॉल्विन अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। कई बार वह डबल ड्यूटी के कारण थक जाती हैं। ऐसे में संगीत सुनकर वह थकान दूर करती हैं और काम का तनाव हावी नहीं होने देती हैं।
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इनसेट
पति का मिला साथ
एडीए नैनी निवासी जॉली माइकल पीटर को पति माइकल पीटर का हमेशा था मिला। एक समय सास की तबीयत खराब होने की वजह से उनका काम करना मुश्किल हो गया था। उस वक्त पति ने मां की देखभाल की जिम्मेदारी उठाई और जॉली ने मरीजों की।
इनसेट
पति ने छोड़ा फर्नीचर का बिजनेस
कॉल्विन अस्पताल के नर्सेस कॉलोनी निवासी सरिता यादव 2019 से अपनी सेवाएं दे रहीं हैं। एक समय परिवार की जिम्मेदारी की वजह से घर को संभालना मुश्किल हो गया था। तब पति ने फर्नीचर का कारोबार बंद कर घर संभाला ताकि सरिता मरीजों की देखभाल कर सकें।
इनसेट
कॉल्विन में बेड बढ़े, पद नहीं
कॉल्विन अस्पताल में जब 100 बेड थे तब नर्सों के 39 पद थे। अब 230 बेड पर मरीजों की सेवा के लिए सिर्फ 33 स्टाफ नर्स हैं। काम के दबाव का असर नर्साें की सेहत पर भी पड़ रहा है। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके चौधरी ने शासन व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को पत्र लिखकर रिक्त पदों को भरने की मांग की है।
इनसेट
जानिए क्या हैं मानक
इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के आधार पर जनरल वार्ड में प्रत्येक छह बेड पर एक स्टॉफ नर्स, आईसीयू व इमरजेंसी में तीन बेड पर एक नर्स की तैनाती होनी चाहिए।
वर्जन
नर्सों के रिक्त पदों की डिमांड के लिए एनएचएम के मिशन डॉयरेक्टर, महानिदेशक व महानिदेशक ट्रेनिंग को पत्र लिखा गया है। हमारी कोशिश होती है कि मरीजों की देखभाल में किसी प्रकार की कोई कमी न होने पाए। - डॉ. एसके चौधरी, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल।
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कॉल्विन में मानकों के आधार पर 111 नर्सों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन अस्पताल सिर्फ 33 स्टाफ नर्सों के भरोसे चल रहा है। ऐसे में उनपर काम का दबाव रहता है। इसके बाद भी वह मरीजों को अपना मानकर दिन-रात सेवा करती हैं। उन्हें जांच से लेकर उपचार तक सब मुहैया कराती हैं।
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संगीत से दूर करती हैं थकान
भावापुर निवासी शुभा सिंह वर्ष 1999 से कॉल्विन अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। कई बार वह डबल ड्यूटी के कारण थक जाती हैं। ऐसे में संगीत सुनकर वह थकान दूर करती हैं और काम का तनाव हावी नहीं होने देती हैं।
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पति का मिला साथ
एडीए नैनी निवासी जॉली माइकल पीटर को पति माइकल पीटर का हमेशा था मिला। एक समय सास की तबीयत खराब होने की वजह से उनका काम करना मुश्किल हो गया था। उस वक्त पति ने मां की देखभाल की जिम्मेदारी उठाई और जॉली ने मरीजों की।
इनसेट
पति ने छोड़ा फर्नीचर का बिजनेस
कॉल्विन अस्पताल के नर्सेस कॉलोनी निवासी सरिता यादव 2019 से अपनी सेवाएं दे रहीं हैं। एक समय परिवार की जिम्मेदारी की वजह से घर को संभालना मुश्किल हो गया था। तब पति ने फर्नीचर का कारोबार बंद कर घर संभाला ताकि सरिता मरीजों की देखभाल कर सकें।
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कॉल्विन में बेड बढ़े, पद नहीं
कॉल्विन अस्पताल में जब 100 बेड थे तब नर्सों के 39 पद थे। अब 230 बेड पर मरीजों की सेवा के लिए सिर्फ 33 स्टाफ नर्स हैं। काम के दबाव का असर नर्साें की सेहत पर भी पड़ रहा है। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके चौधरी ने शासन व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को पत्र लिखकर रिक्त पदों को भरने की मांग की है।
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जानिए क्या हैं मानक
इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के आधार पर जनरल वार्ड में प्रत्येक छह बेड पर एक स्टॉफ नर्स, आईसीयू व इमरजेंसी में तीन बेड पर एक नर्स की तैनाती होनी चाहिए।
वर्जन
नर्सों के रिक्त पदों की डिमांड के लिए एनएचएम के मिशन डॉयरेक्टर, महानिदेशक व महानिदेशक ट्रेनिंग को पत्र लिखा गया है। हमारी कोशिश होती है कि मरीजों की देखभाल में किसी प्रकार की कोई कमी न होने पाए। - डॉ. एसके चौधरी, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल।

सुभा सिंह- फोटो : Samvad

सुभा सिंह- फोटो : Samvad

सुभा सिंह- फोटो : Samvad