फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   No protest , no work around Ginakr

विरोध नहीं, काम गिनाकर आएं करीब

Tue, 14 Jun 2016 01:42 AM IST
अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 14 Jun 2016 01:42 AM IST
विज्ञापन
No protest , no work around Ginakr
केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाई - फोटो : ANI
लोकसभा चुनाव से पूर्व हर रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कहना नहीं भूलते थे कि विरोधी दलों ने ही दिल्ली का रास्ता आसान कर दिया है। मोदी-मोदी करके 90 फीसदी प्रचार तो विरोधी खुद कर दे रहे हैं। राजनीतिक रणनीतिकारों ने भी माना कि कांग्रेस तथा अन्य दलों के जरूरत से ज्यादा विरोध ने मोदी को देश का चेहरा बना दिया। वहीं भाजपा विकास के एजेंडे को प्रभावी तरीके से लोगों के बीच ले जाने में सफल रही, जो उनकी बड़ी जीत का कारण बना। विश्लेषकों ने इसे भारतीय राजनीति में सकारात्मक बदलाव के रूप में लिया। लेकिन अब युवाओं, बुद्धिजीवियों का मानना है कि  विरोध की सियासत से बेहतर उपलब्धियां गिनाना है। लोग अब विरोधियों पर हमले के बजाय यह जानना चाहते हैं कि बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार जैसी जड़ कर चुकी चुनौतियों से निपटने के लिए उनके पास क्या योजनाएं हैं। 
विज्ञापन


दिल्ली और बिहार में झटका खाने के बावजूद भाजपा के रणनीतिकार अखिलेश सरकार की नाकामियों को लेकर अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता के बीच जाना चाहते हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा तथा अन्य दल अपनी योजनाएं बताने के बजाय आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल पर अधिक हमलावर रहे। इसके बाद बिहार में भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के लालू यादव गठबंधन पर हमला बोलकर चुनाव में बढ़त की रणनीति बनाई लेकिन दोनों ही चुनाव में अप्रत्याशित नतीजे सामने आए।
विज्ञापन


इन दोनाें चुनाव में हार के बावजूद अब एक बार फिर भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिनी बैठक में यूपी फतह के लिए अखिलेश सरकार की नाकामियों के साथ जनता केबीच जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में मथुरा, कैराना जैसी घटनाओं और प्रदेश की लचर कानून-व्यवस्था के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया। संगम की रेती पर आयोजित परिवर्तन रैली में भी भाजपा नेताओं का संबोधन पार्टी की नीतियों के बजाय अखिलेश सरकार और परिवारवाद पर केंद्रित रहा। उन्होंने भाजपा को सपा और बसपा के विकल्प के रूप में खुद को प्रस्तुत किया। वहीं नीतिश कुमार और केजरीवाल की तरह अखिलेश यादव चार साल में किए गए काम को लेकर अभी से जनता के बीच में हैं। ऐसे में सियासी हल्के में यह चर्चा आम है कि विपक्षियों के विरोध की रणनीति के चक्रब्यूह में भाजपा खुद न फंस जाएं। यह चिंता भाजपा नेताओं की भी है। उनका मानना है कि विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार को कोसने के बजाय मोदी सरकार की दो साल की उपलब्धियों के साथ विजन-यूपी के एजेंडे के साथ आगे बढ़ा जाए, तभी जीत की राह आसान होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed