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Allahabad High Court : दो वयस्कों के व्यक्तिगत रिश्तों में किसी बाहरी का हस्तक्षेप नहीं है स्वीकार्य
Wed, 19 Oct 2022 09:44 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 19 Oct 2022 09:44 PM IST
सार
याची ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर याची नंबर दो यानी अपनी पत्नी को उसके घर वालों से मुक्त कराकर उसे वापस दिलाने की मांग की थी। मामले में हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों से नोटिस इश्यू कर जवाब मांगा तो उन्होंने नोटिस इश्यू करा दिया
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हाईकोर्ट।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के बीच किसी बाहरी का हस्तक्षेप करना स्वीकार्य नहीं है। यह उनका निजी मामला है। कोर्ट ने मामले में बागपत के याची को याची दो के साथ रहने का आदेश दिया। रजिस्ट्रार से कहा कि याची एक की ओर से जमा कराए गए 40 हजार रुपये की रकम उसे वापस कर दी जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने संदीप कुमार तथा अन्य की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
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याची ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर याची नंबर दो यानी अपनी पत्नी को उसके घर वालों से मुक्त कराकर उसे वापस दिलाने की मांग की थी। मामले में हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों से नोटिस इश्यू कर जवाब मांगा तो उन्होंने नोटिस इश्यू करा दिया। इसके बाद प्रतिवादियों की ओर से दिल्ली के गोकुल थाने में रेप सहित पॉक्सो की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करा दी।
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जबकि, पत्नी ने कोर्ट के बयान में पति केसाथ रहने की इच्छा जताई। इस पर कोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के निजी जीवन में बाहरी लोगों का हस्तक्षेप सही नहीं है। कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए पत्नी को उसकी सहमति के बाद पति के साथ रहने का आदेश पारित किया।
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