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High Court : सार्वजनिक हित के बिना किसी की व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जा सकती
Thu, 08 Jan 2026 04:53 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 08 Jan 2026 04:53 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि मांगी गई जानकारी का किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है तो उसे व्यक्तिगत माना जाएगा।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि मांगी गई जानकारी का किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है तो उसे व्यक्तिगत माना जाएगा। ऐसे में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत उसके खुलासे पर रोक रहेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार की एकलपीठ ने मित्रसेन कुमार सिंह की याचिका पर दिया।
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मऊ निवासी याची मित्रसेन ने आरटीआई के तहत ग्राम पंचायत परसुपुर मुबारकपुर के परिवार रजिस्टर में प्रद्युम्न नामक व्यक्ति का नाम दर्ज किए जाने से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसके बाद राज्य सूचना आयोग के समक्ष अपील दायर की। इस पर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के गिरीश राम चंद देश पांडेय मामले का हवाला देते हुए कहा कि मांगी गई जानकारी व्यक्तिगत है। 19 सितंबर 2024 के आदेश से अपील खारिज कर दी तो याची ने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सूचना आयोग के फैसले को बरकरार रखा। कहा, याची यह साबित करने में विफल रहा कि मांगी गई जानकारी का किसी भी सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से क्या संबंध है। हाईकोर्ट ने याचिका को योग्यता के अभाव में खारिज कर दी।
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