Prayagraj : शक कितना भी मजबूत हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता, हत्या के आरोपी को मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शक कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह सबूत की जगह नहीं ले सकता। आरोपी की दुकान से कुल्हाड़ी बरामद हो जाने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसने ही हत्या की है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शक कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह सबूत की जगह नहीं ले सकता। आरोपी की दुकान से कुल्हाड़ी बरामद हो जाने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसने ही हत्या की है। यह टिप्पणी कर न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने हत्या के आरोपी कृष्णानंद चौहान की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
आजमगढ़ के जहानाबाद थाने में कृष्णानंद चौहान पर शिकायतकर्ता ने हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। आरोपी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। याची अधिवक्ता बीके सिंह चौहान ने दलील दी कि एफआईआर में कृष्णानंद चौहान का नाम तीन अन्य लोगों के साथ था। किसी ने भी वास्तविक घटना नहीं देखी। शिकायतकर्ता ने संदेह के आधार पर आवेदक और अन्य को आरोपी बनाया है। संदेह के अलावा कोई पुख्ता सबूत नहीं है। कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह पिछले पांच महीने से अधिक समय से जेल में है।
शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। दलील दी कि आवेदक ने ही हत्या की है और उसके दुकान से कुल्हाड़ी बरामद हुई है। अदालत ने कहा कि जब तक दोषी सिद्ध न हो जाए, एक आरोपी को निर्दोष माना जाता है और दंडात्मक उद्देश्यों के लिए जमानत याचिका खारिज नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।