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न गंगा निर्मल हुईं, न गोहत्या बंद हुई
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:12 AM IST
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
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शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने गंगा, गोहत्या और धारा 370 के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। कहा कि केंद्र सरकार ने चुनाव के समय कई वादे किए थे, लेकिन अब तक गंगा अविरल और निर्मल नहीं हुईं। जम्मू कश्मीर में धारा 370 नहीं हटाई गई। गोहत्या भी बंद नहीं हुई है।
मनकामेश्वर मंदिर में पत्रकारों से औपचारिक बातचीत में शंकराचार्य ने कई मुद्दे उठाए। कहा, हिंदुओं के लिए सरकार कुछ भी नहीं करना चाहती है। साथ ही सनातन धर्माचार्यों के अधिकार भी समाप्त करने पर तुली है। पहली बार माघ मेला में उन्हें शिविर के लिए भूमि आवंटित नहीं की गई। मेला प्रशासन सरकार के इशारे पर ऐसा कर रहा है। मेला क्षेत्र में कई फर्जी शंकराचार्यों के बोर्ड लगे हैं। मेला प्रशासन ने उन्हें भूमि आवंटित की और सारी सुविधाएं भी दी हैं, जबकि उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘मेरा बतौर ज्योतिष्पीठाधीश्वर 1973 में और द्वारकापीठाधीश्वर 1982 में अभिषेक हुआ। भारत धर्म महामंडल ने 29 नवंबर को दोबारा मेरा अभिषेक किया। इस बार काशी प्रवास के दौरान मुझे ज्योतिष्पीठ की ट्रस्ट डीड भी दे दी गई है। इसके बाद भी प्रशासन यह मान नहीं रहा है कि हम ही ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर हैं, तो सरकार ही बता दे कि इन पीठों का शंकराचार्य कौन है।
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शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सहित कई संतों ने शनिवार को मुलाकात की। संतों ने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और कई मुद्दों पर चर्चा की। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि शंकराचार्य सनातन धर्म के सर्वोच्च हैं। उनका सम्मान सर्वोपरि है। उनकी मांग जायज है। उन्हें बतौर ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर के तौर पर भूमि आवंटित की जाती रही है। शासन इसे संज्ञान में ले ताकि सनातन धर्म के इस मेले में उनका प्रवेश सुनिश्चित हो सके।
तीर्थराज प्रयाग में सनातन से लगने वाला माघ मेला, मेला नहीं बल्कि गंगास्नान का महापर्व है। यहां आने वाले संत महात्माओं एवं श्रद्धालुओं की सुख सुविधा के लिए जो भी सरकार है, व्यवस्था करना उसका दायित्व है। सबसे बड़ा दायित्व गंगा-यमुना की पवित्र अविरल निर्मल धारा उपलब्ध कराना है। यदि गंगा-यमुना में प्रदूषण रहता है तो मेले की व्यवस्था शून्य हो जाती है। पहले जमाने में कोई संक्रामक रोग न हो जाए टीके की व्यवस्था थी। गंगा स्नान के लिए आए लाखों लोग सीवर और कई खतरनाक केमिकल मिले जल में डुबकी लगा रहे हैं।
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मनकामेश्वर मंदिर में पत्रकारों से औपचारिक बातचीत में शंकराचार्य ने कई मुद्दे उठाए। कहा, हिंदुओं के लिए सरकार कुछ भी नहीं करना चाहती है। साथ ही सनातन धर्माचार्यों के अधिकार भी समाप्त करने पर तुली है। पहली बार माघ मेला में उन्हें शिविर के लिए भूमि आवंटित नहीं की गई। मेला प्रशासन सरकार के इशारे पर ऐसा कर रहा है। मेला क्षेत्र में कई फर्जी शंकराचार्यों के बोर्ड लगे हैं। मेला प्रशासन ने उन्हें भूमि आवंटित की और सारी सुविधाएं भी दी हैं, जबकि उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा, ‘मेरा बतौर ज्योतिष्पीठाधीश्वर 1973 में और द्वारकापीठाधीश्वर 1982 में अभिषेक हुआ। भारत धर्म महामंडल ने 29 नवंबर को दोबारा मेरा अभिषेक किया। इस बार काशी प्रवास के दौरान मुझे ज्योतिष्पीठ की ट्रस्ट डीड भी दे दी गई है। इसके बाद भी प्रशासन यह मान नहीं रहा है कि हम ही ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर हैं, तो सरकार ही बता दे कि इन पीठों का शंकराचार्य कौन है।
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शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सहित कई संतों ने शनिवार को मुलाकात की। संतों ने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और कई मुद्दों पर चर्चा की। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि शंकराचार्य सनातन धर्म के सर्वोच्च हैं। उनका सम्मान सर्वोपरि है। उनकी मांग जायज है। उन्हें बतौर ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर के तौर पर भूमि आवंटित की जाती रही है। शासन इसे संज्ञान में ले ताकि सनातन धर्म के इस मेले में उनका प्रवेश सुनिश्चित हो सके।
तीर्थराज प्रयाग में सनातन से लगने वाला माघ मेला, मेला नहीं बल्कि गंगास्नान का महापर्व है। यहां आने वाले संत महात्माओं एवं श्रद्धालुओं की सुख सुविधा के लिए जो भी सरकार है, व्यवस्था करना उसका दायित्व है। सबसे बड़ा दायित्व गंगा-यमुना की पवित्र अविरल निर्मल धारा उपलब्ध कराना है। यदि गंगा-यमुना में प्रदूषण रहता है तो मेले की व्यवस्था शून्य हो जाती है। पहले जमाने में कोई संक्रामक रोग न हो जाए टीके की व्यवस्था थी। गंगा स्नान के लिए आए लाखों लोग सीवर और कई खतरनाक केमिकल मिले जल में डुबकी लगा रहे हैं।