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कोविड 19 के कारण पैदा हुए हालात में प्रत्यावेदन तय करने में देरी नहीं-हाईकोर्ट
Fri, 27 Aug 2021 07:03 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 27 Aug 2021 07:03 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि याची ने स्वयं ही कहा है कि कोरोना के कारण हलफनामा देने के लिए हाईकोर्ट नहीं आ सका। सरकार ने उठाए गए त्वरित कदमों की जानकारी दी है। कोर्ट ने रासुका निरुद्धि आदेश के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी बस्ती द्वारा काली प्रसाद उर्फ पंडित सिंह को रासुका के तहत निरुद्धि की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कोरोना संक्रमण की परिस्थितियों को देखते हुए याची का प्रत्यावेदन निस्तारित करने में अनुचित विलंब नहीं हुआ है। जब कि याची के वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस मिश्र का कहना था कि निस्तारण में 57दिन की देरी का कारण नहीं बताया गया है।
कोर्ट ने कहा कि याची ने स्वयं ही कहा है कि कोरोना के कारण हलफनामा देने के लिए हाईकोर्ट नहीं आ सका। सरकार ने उठाए गए त्वरित कदमों की जानकारी दी है। कोर्ट ने रासुका निरुद्धि आदेश के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने काली प्रसाद की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कोविड 19 की परिस्थितियों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि प्रत्यावेदन तय करने में देरी की गई है।
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कोर्ट ने कहा कि याची ने स्वयं ही कहा है कि कोरोना के कारण हलफनामा देने के लिए हाईकोर्ट नहीं आ सका। सरकार ने उठाए गए त्वरित कदमों की जानकारी दी है। कोर्ट ने रासुका निरुद्धि आदेश के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने काली प्रसाद की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कोविड 19 की परिस्थितियों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि प्रत्यावेदन तय करने में देरी की गई है।
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