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पूजा पंडाल : संकरे निकास द्वार, आग से बचाव के भी नहीं इंतजाम, भदोही की घटना से भी नहीं लिया सबक

Tue, 04 Oct 2022 12:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 04 Oct 2022 12:14 AM IST
सार

शहर में कुल 56 जगहों पर दुर्गा पूजा पंडाल सजाए गए हैं। इसके लिए अनुमति जारी करने से पहले अग्निशमन विभाग की ओर से भी जांच कर आख्या लगाई जाती है। फाइलों में इन सभी 56 पूजा पंडालों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं।

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no arrangements for fire protection lessons not even learned from Bhadohi incident
कीडगंज नेतानगर के पूजा पंडाल सीढ़िया सकरी होने से दर्शन पूजन में दिक्कत हो रही है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

औराई में हुए भीषण अग्निकांड के बाद दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ी बात यह है कि कागजों में तो सब ओके है लेकिन जिले में भी हाल औराई से जुदा नहीं है। आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम तो हैं नहीं, साथ ही निकास संबंधी अन्य मानकों का भी ध्यान नहीं रखा गया है।

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शहर में कुल 56 जगहों पर दुर्गा पूजा पंडाल सजाए गए हैं। इसके लिए अनुमति जारी करने से पहले अग्निशमन विभाग की ओर से भी जांच कर आख्या लगाई जाती है। फाइलों में इन सभी 56 पूजा पंडालों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं। लेकिन असलियत यह है कि ज्यादातर में अग्निशमन मानकों को ताक पर रख दिया गया है। 

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no arrangements for fire protection lessons not even learned from Bhadohi incident
Prayagraj News : कीडगंज नेतानगर के पूजा पंडाल सीढ़िया सकरी होने से दिक्कत हो रही है। - फोटो : अमर उजाला।

सिर्फ एक निकास द्वार
मानकों के मुताबिक, बड़े पूजा पंडालों में निकास के दो द्वार होने चाहिए। लेकिन दरभंगा कॉलोनी स्थित पूजा पंडाल में सिर्फ एक ही द्वार बनाया गया है। गौरतलब है कि यह पूजा पंडाल शहर के उन चुनिंदा पंडालों में से एक है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना होता है। मानकों के अनुसार, अग्निशमन के लिए पानी के ड्रम, बालू की बाल्टियों की व्यवस्था भी होनी चाहिए। लेकिन सोमवार को यह व्यवस्थाएं नहीं नजर आईं। अलबत्ता टीम के पहुंचने के कुछ देर बाद फायर इंस्टिग्विशर प्रवेश द्वार के पास रखवा दिए गए। 


सिर्फ एक ही इंस्टिग्विशर
शहर के बड़े पूजा पंडालों में बाई का बाग स्थित पूजा पंडाल भी शुमार किया जाता है। मानकों के अनुसार, यहां पर्याप्त व्यवस्था में पानी के ड्रम, बालू की बाल्टियां और फायर इंस्टिग्विशर की व्यवस्था होनी चाहिए। पंडाल में अग्निशमन व्यवस्था के नाम पर एक ही फायर इंस्टिग्विशर नजर आया। हालांकि मानकों के हिसाब से यहां दो निकास द्वार बनाए गए थे। 

गलियाें में भी स्थापित हैं मूर्तियां
शहर में कई स्थानों पर गलियों में भी पूजा पंडाल बनाए गए हैं। इनमें बैरहना, कीडगंज, मुट्ठीगंज व अन्य इलाके शामिल हैं। यहां अग्निशमन मानकों का कोई ख्याल नहीं रखा गया है। प्रवेश और निकास का रास्ता एक ही है। न तो फायर इंस्टिग्विशर की व्यवस्था है और न ही बालू की बाल्टियों समेत अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां सवाल यह भी है कि जब अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, तो अग्निशमन विभाग की ओर से सब कुछ ओके होने की आख्या कैसे लगा दी गई। 


12 टीमें गठित
औराई में दुर्गा पूजा पंडाल में अग्नि दुर्घटना के बाद सोमवार को जिला अग्निशमन विभाग की नींद टूटी। आननफानन में शहर में चार और देहात क्षेत्र को मिलाकर कुल 12 टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने पूजा पंडालों में जाकर अग्निशमन की व्यवस्थाएं देखीं। साथ ही कमेटियों व आयोजकों को अग्निशमन व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया। सीएफओ, एफएसओ खुद कई पूजा पंडालों में पहुंचे और आग से बचाव के इंतजामों को परखा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर अब तक अग्निशमन विभाग की ओर से निरीक्षण क्यों नहीं किया गया था।


कुल 12 टीमें बनाकर पूजा पंडालों का निरीक्षण किया गया। जहां भी अग्निशमन व्यवस्था पूर्ण नहीं थी, वहां व्यवस्था कराई गई। अग्निशमन मानकों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। - डॉ. राजीव पांडेय, सीएफओ

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