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Nithari Kand: केस की बिखरी कड़ियां जोड़ने में नाकाम रही सीबीआई, जांच पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
Tue, 17 Oct 2023 10:27 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 17 Oct 2023 10:27 AM IST
सार
Nithari Case News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी नरसंहार में सीबीआई कोर्ट से फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने कहा, पुलिस दोनों के खिलाफ आरोपी साबित करने में विफल रही। न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने जांच पर नाखुशी जताई।
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निठारी कांड के आरोपी मनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
नोएडा के निठारी कांड में मौत की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के बावजूद निठारी हत्याकांड में अंग व्यापार की संभावित संलिप्तता की जांच करने में अभियोजन पक्ष की विफलता जांच एजेंसियों द्वारा जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात से कम नहीं है।
पीठ ने कहा कि छोटे बच्चों और महिलाओं की जान जाना गंभीर चिंता का विषय है, खासकर तब जब उनके जीवन को बेहद अमानवीय तरीके से समाप्त कर दिया गया है। लेकिन इसके कारण आरोपियों को निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने कहा, नोएडा के सेक्टर-31 में मकान संख्या डी-5 के भीतर से एकमात्र बरामदगी दो चाकू और एक कुल्हाड़ी की है, जिनका उपयोग बलात्कार, हत्या आदि के अपराध को अंजाम देने के लिए नहीं किया गया था, लेकिन आरोप है कि पीड़ितों की गला दबाकर हत्या करने के बाद शरीर के अंगों को काटने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया था।
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सीबीआई के वकील संजय यादव, मंबई से आए कोली के वकील युग चौधरी व पयोसी राय और मोनिंदर सिंह पंढेर की वकील मनीषा भंडारी ने जुलाई से चली सुनवाई के दौरान हफ्तों अपनी दलीलें पेश कीं।
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पीठ ने कहा कि छोटे बच्चों और महिलाओं की जान जाना गंभीर चिंता का विषय है, खासकर तब जब उनके जीवन को बेहद अमानवीय तरीके से समाप्त कर दिया गया है। लेकिन इसके कारण आरोपियों को निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने कहा, नोएडा के सेक्टर-31 में मकान संख्या डी-5 के भीतर से एकमात्र बरामदगी दो चाकू और एक कुल्हाड़ी की है, जिनका उपयोग बलात्कार, हत्या आदि के अपराध को अंजाम देने के लिए नहीं किया गया था, लेकिन आरोप है कि पीड़ितों की गला दबाकर हत्या करने के बाद शरीर के अंगों को काटने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया था।
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सीबीआई के वकील संजय यादव, मंबई से आए कोली के वकील युग चौधरी व पयोसी राय और मोनिंदर सिंह पंढेर की वकील मनीषा भंडारी ने जुलाई से चली सुनवाई के दौरान हफ्तों अपनी दलीलें पेश कीं।
कोली और पंढेर के वकीलों ने दोनों की गिरफ्तारी से लेकर सीबीआई कोर्ट के फांसी की सजा होने तक के घटनाक्रमों पर गंभीर सवाल उठाए थे। वकीलों ने पुलिस और सीबीआई की जांच, नरकंकालों की बरामदगी, हत्या में प्रयुक्त हथियारों और कोर्ट की विसंगतिपूर्ण कार्यवाही में चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे थे।
कोली को यातनाएं देकर बयान लेने का आरोप
वकीलों ने कोली के बयान दर्ज करने के दौरान उसे अमानवीय यातनाएं देना और कोर्ट में उसके इकबालिया बयान की पेश हुई वीडियो रिकॉर्डिंग की सीडी से कोली और मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर गायब होने का मामला भी सामने रखा।
वकीलों ने कोली के बयान दर्ज करने के दौरान उसे अमानवीय यातनाएं देना और कोर्ट में उसके इकबालिया बयान की पेश हुई वीडियो रिकॉर्डिंग की सीडी से कोली और मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर गायब होने का मामला भी सामने रखा।
हत्याओं से कुल्हाड़ी का संबंध नहीं जोड़ पाई सीबीआई
बचाव पक्ष के वकीलों की दलील थी कि सिलसिलेवार हुई हत्याओं में प्रयुक्त हथियारों में चुन्नी, पोंछे वाले कपड़े और चाकू के साथ कुल्हाड़ी का प्रयोग भी दर्शाया गया, लेकिन सीबीआई हत्याओं का कुल्हाड़ी से सीधा रिश्ता जोड़ने में नाकाम रही। हाईकोर्ट ने अभियोजन से जब इसका जवाब मांगा तो वह निरुत्तर रहे। सोमवार को दिल दहला देने वाले निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को हाईकोर्ट ने सभी मामलों से दोषमुक्त करार दिया।
बचाव पक्ष के वकीलों की दलील थी कि सिलसिलेवार हुई हत्याओं में प्रयुक्त हथियारों में चुन्नी, पोंछे वाले कपड़े और चाकू के साथ कुल्हाड़ी का प्रयोग भी दर्शाया गया, लेकिन सीबीआई हत्याओं का कुल्हाड़ी से सीधा रिश्ता जोड़ने में नाकाम रही। हाईकोर्ट ने अभियोजन से जब इसका जवाब मांगा तो वह निरुत्तर रहे। सोमवार को दिल दहला देने वाले निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को हाईकोर्ट ने सभी मामलों से दोषमुक्त करार दिया।
कोली पर यूं अंजाम देने का था आरोप
कोली पर आरोप लगा था कि वह लड़कियों को नौकरी और चॉकलेट का लालच देकर कोठी में बुलाता था। उसके बाद उनसे दुष्कर्म कर हत्या कर देता था। इसके बाद लाश के टुकड़े-टुकड़े करके उन्हें कोठी के पीछे नाले में फेंक आता था। पीड़ित लड़कियों में एक पंढेर की महिला मित्र भी थी। पंढेर पर अनैतिक देह व्यापार में संलिप्तता और कोली के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप लगा था।
कोली पर आरोप लगा था कि वह लड़कियों को नौकरी और चॉकलेट का लालच देकर कोठी में बुलाता था। उसके बाद उनसे दुष्कर्म कर हत्या कर देता था। इसके बाद लाश के टुकड़े-टुकड़े करके उन्हें कोठी के पीछे नाले में फेंक आता था। पीड़ित लड़कियों में एक पंढेर की महिला मित्र भी थी। पंढेर पर अनैतिक देह व्यापार में संलिप्तता और कोली के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप लगा था।
12 साल में 134 तारीखें, तीन माह में फैसला
कोली और पंढेर ने फांसी की सजा के खिलाफ वर्ष 2010 से अपीलें दाखिल कीं। उनकी अपीलों पर विभिन्न खंडपीठों में सुनवाई चली। कुल 134 तारीखें लगाई गईं, लेकिन विभिन्न कारणों से एक भी अपील पर फैसला नहीं आ सका। बाद में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने रोजाना सुनवाई कर तीन माह में ही फैसला सुनाया।
कोली और पंढेर ने फांसी की सजा के खिलाफ वर्ष 2010 से अपीलें दाखिल कीं। उनकी अपीलों पर विभिन्न खंडपीठों में सुनवाई चली। कुल 134 तारीखें लगाई गईं, लेकिन विभिन्न कारणों से एक भी अपील पर फैसला नहीं आ सका। बाद में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने रोजाना सुनवाई कर तीन माह में ही फैसला सुनाया।
अदालती कार्रवाई
- 8 फरवरी 2007 को कोली और पंढेर को 14 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा गया।
- मई 2007 को सीबीआई ने पंढेर को अपनी चार्जशीट में अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपमुक्त कर दिया। दो माह बाद कोर्ट की फटकार के बाद फिर सहअभियुक्त बनाया।
- 13 फरवरी 2009 को सीबीआई कोर्ट ने पंढेर और कोली को 15 वर्षीय किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार देते हुए पहली बार फांसी की सजा सुनाई।
- 3 सितंबर 2014 को कोली के खिलाफ कोर्ट ने मौत का वारंट जारी किया।
- 4 सितंबर 2014 को कोली को गाजियाबाद की डासना जेल से फांसी देने के लिए मेरठ जेल ले जाया गया।
- 12 सितंबर 2014 को फांसी से पहले रात को ही वकीलों के समूह डेथ पेनल्टी लिटिगेशन ग्रुप्स ने कोली को मृत्युदंड देने पर पुनर्विचार याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा।
- 12 सितंबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा पर अक्तूबर 29 तक के लिए रोक लगाई।
- 28 अक्तूबर 2014 को सुरेंद्र कोली की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को खारिज किया। 2014 में राष्ट्रपति ने भी दया याचिका रद्द कर दी।
कब-किसे सुनाई गई फांसी की सजा
- 13 फरवरी 2009 : सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर सिंह पंढेर फांसी की सजा। हाईकोर्ट से पंढेर पूर्व में हो चुका बरी।
- 12 मई 2010 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा।
- 28 अक्तूबर 2010 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा।
- 22 दिसंबर 2010 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा।
- 24 दिसंबर 2012 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा।
- 7 अक्तूबर 2016 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा।
- 16 दिसंबर 2016 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा।
- 24 जुलाई 2017 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा, पंढेर बरी।
- 08 दिसंबर 2017 : सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर सिंह पंढेर को फांसी की सजा।
- 02 मार्च 2019 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा, पंढेर बरी।
- 06 अप्रैल 2019 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा, पंढेर बरी।
- 15 जनवरी 2021 : सुरेंद्र कोली में फांसी की सजा, पंढेर बरी।
निचली अदालत में 305 तारीखों पर पेश हुए 38 गवाह
सीबीआई ने 11 जनवरी 2007 को केस अपने हाथ में लिया था। 26 जुलाई 2007 को विशेष सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट पेश की। सीबीआई कोर्ट में कुल 305 तारीखों पर सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 38 गवाह पेश किए।
सीबीआई ने 11 जनवरी 2007 को केस अपने हाथ में लिया था। 26 जुलाई 2007 को विशेष सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट पेश की। सीबीआई कोर्ट में कुल 305 तारीखों पर सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 38 गवाह पेश किए।