Prayagraj : ट्रेन से 93 बच्चों को उतारने के मामले में नौ एजेंट हिरासत में, खुल्दाबाद थाने में दी गई तहरीर
एजेंटों ने अपना नाम मुदस्सिर, जावेद अख्तर, मो. इश्तियाक आलम, शमशेर आलम, मुजफ्फर आलम, मो. अकबर, सऊद आलम, जलालुद्दीन व मो. आलम बताया है। यह सभी बिहार के अररिया के रहने वाले हैं। पुलिस देर रात तक उनसे पूछताछ में जुटी रही। फिलहाल वह यही कहते रहे कि बच्चों को मदरसों में पढ़ाने के लिए ले जाया जा रहा था।
विस्तार
सीमांचल एक्सप्रेस से 93 बच्चों को अवैध तरीके से आनंद विहार ले जाने के मामले में शुक्रवार शाम खुल्दाबाद थाने में तहरीर दी गई। बचपन बचाओ आंदोलन के देशराज सिंह की ओर से बच्चों को ले जाने वाले नौ एजेंटों के खिलाफ तहरीर दी गई। आरोप लगाया कि बच्चों को अमानवीय व अवैध तरीके से ले जाया जा रहा था। एजेंटों को हिरासत में लेकर पुलिस देर रात तक लिखापढ़ी में जुटी रही।
एजेंटों ने अपना नाम मुदस्सिर, जावेद अख्तर, मो. इश्तियाक आलम, शमशेर आलम, मुजफ्फर आलम, मो. अकबर, सऊद आलम, जलालुद्दीन व मो. आलम बताया है। यह सभी बिहार के अररिया के रहने वाले हैं। पुलिस देर रात तक उनसे पूछताछ में जुटी रही। फिलहाल वह यही कहते रहे कि बच्चों को मदरसों में पढ़ाने के लिए ले जाया जा रहा था।
खुल्दाबाद पुलिस ने बताया कि तहरीर में किशोर न्याय अधिनियम के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि बच्चों को अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध तरीके से ले जाया जा रहा था। एसीपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया जा रहा है।
यह है पूरा मामला
बिहार के जोगबनी से आनंद विहार जा रही सीमांचल एक्सप्रेस से बृहस्पतिवार को 93 बच्चे प्रयागराज जंक्शन पर उतारे गए थे। आरोप था कि उन्हें तस्करी कर ले जाया जा रहा है। बच्चों के साथ नौ लोग थे। बाद में पता चला कि बच्चे पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज आदि जिलों के हैं। इसके बाद बच्चों को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया था।
तहरीर में यह लगाया आरोप
बचपन बचाओ आंदोलन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर देशराज सिंह की तहरीर के मुताबिक, बाल कल्याण समिति की ओर से की गई काउंसिलिंग के बाद की यह बताया गया कि नाबालिग बालकों को परिजनों की सहमति पत्र के बगैर राजस्थान, हरियाण व दिल्ली के मदरसों में ले जाया जा रहा था। एक सीट प 10-10 बच्चों को अमानवीय तरीके से बैठाया गया था। इस तरह से बगैर अभिभावकों के सहमति पत्र के ले जाना व सुविधाओं का ध्यान न रखना किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।