Nagar Nikay Chunav: ओबीसी के लिए आरक्षित हुई प्रयागराज नगर निगम की सीट, छह नगर पंचायतों पर महिलाएं होंगी काबिज
करीब 19 वर्ष बाद 1989 में नगर निकायों के लिए चुनाव हुआ था। उस समय प्रयागराज (इलाहाबाद) महानगर पालिका थी और पार्षदों ने नगर प्रमुख का चुनाव किया था। 1989 के चुनाव में श्यामा चरण गुप्ता नगर प्रमुख चुने गए थे। हालांकि, उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से एक वर्ष पहले इस्तीफा दे दिया था और उपचुनाव में रविभूषण बधावन नगर प्रमुख निर्वाचित हुए।
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विस्तार
नगर निगम तथा पंचायत अध्यक्षों का आरक्षण सोमवार को जारी कर दिया गया। अटकलों एवं दावों के विपरीत प्रयागराज नगर निगम महापौर की सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है। आरक्षण को लेकर आईं आपत्तियों के निस्तारण के बाद कोई फेरबदल नहीं हुआ तो नगर निगम के इतिहास में पिछड़ा वर्ग से पहली बार कोई महापौर चुना जाएगा।
करीब 19 वर्ष बाद 1989 में नगर निकायों के लिए चुनाव हुआ था। उस समय प्रयागराज (इलाहाबाद) महानगर पालिका थी और पार्षदों ने नगर प्रमुख का चुनाव किया था। 1989 के चुनाव में श्यामा चरण गुप्ता नगर प्रमुख चुने गए थे। हालांकि, उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से एक वर्ष पहले इस्तीफा दे दिया था और उपचुनाव में रविभूषण बधावन नगर प्रमुख निर्वाचित हुए।
नगर निगम के गठन के बाद 1995 में चुनाव हुए। यह पहला मौका था जब जनता ने महापौर चुना। उस समय यह सीट महिलाओं के आरक्षित थी और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी महापौर चुनी गईं। इसके बाद वर्ष 2000 में डॉ. केपी श्रीवास्तव तथा 2006 में चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह महापौर निर्वाचित हुए। इसके बाद फिर यह सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई और अभिलाषा गुप्ता नंदी महापौर चुनी गईं।
2017 में यह सीट फिर अनारक्षित हो गई और अभिलाषा गुप्ता दोबारा मेयर चुनी गईं। इस तरह से इस सीट पर अब तक हुए पांच चुनाव में चार महापौर चुने गए और सभी सामान्य वर्ग से रहे। अब आगामी चुनाव में प्रयागराज नगर निगम सीट पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। हालांकि 12 दिसंबर तक आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद आरक्षण में कोई फेरबदल नहीं हुआ तो प्रयागराज में पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग से मेयर चुना जाएगा।
अटकलों पर विराम
प्रदेेश की 17 नगर निगमों में रेंडम सर्वे के आधार पर तैयार जातिगत आंकड़ाें एवं पूर्व आरक्षणों को देखते हुए यहां की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने की बात कही जा रही थी। इस बाबत प्रस्ताव भेजे जाने की बात भी कही जा रही थी। इसी के अनुसार अनुसूचित जाति वर्ग से कई दावेदार भी सामने आ गए थे, लेकिन सोमवार को आरक्षण की सूची जारी होने के बाद सभी तरह के अटकलों पर विराम लग गया।
पहली बार छह नगर पंचायतें महिलाओं के खाते में
जिले की आठ नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के आरक्षण की घोषणा भी सोमवार को कर दी गई। इनमें से छह सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। ऐसा पहली बार होगा जब छह नगर पंचायतों में अध्यक्ष महिलाएं होंगी। हालांकि, अभी 12 दिसंबर तक आपत्तियां मांगी गईं हैं। इनके निस्तारण के बाद ही अंतिम आरक्षण जारी किया जाएगा।
पिछले चुनाव तक जिले में नौ नगर पंचायतें थीं, लेकिन नगर निगम सीमा के विस्तार के बाद झूंसी नगर पंचायत खत्म हो गई। इस तरह से अब आठ नगर पंचायतें हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 2012 में सबसे अधिक चार सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। इस बार आठ में से छह नगर पंचायतें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इनमें से शंकरगढ़ नगर पंचायत ओबीसी महिला के आरक्षित है। लालगोपालगंज, हंडिया, कोरांव, भारतगंज एवं सिरसा नगर पंचायतें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। मऊआइमा एवं फूलपुर नगर पंचायतें अनारक्षित हैं।
नगर पंचायतेें आरक्षण
शंकरगढ़ ओबीसी महिला
लालगोपालगंज महिला
हंडिया महिला
कोरांव महिला
सिरसा महिला
भारतगंज महिला
मऊआइमा अनारक्षित
फूलपुर अनारक्षित
वार्डों के आरक्षण पर आईं 31 आपत्तियां
नगर निगम एवं नगर पंचायतों के वार्ड के लिए पूर्व में जारी आरक्षण पर आपत्तियों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। नगर निगम के वार्डों के लिए अब तक 30 आपत्तियां आई हैं। 20 आपत्तियां तो सोमवार को आईं। वहीं नगर पंचायतों के लिए सिर्फ एक वार्ड के लिए आपत्ति आई है।