द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक पेंशन दस्तावेजों को सहेजेगा एनआईए
- अफसरों की बैठक में दस्तावेजों के हस्तांतरण पर बनी सहमति
- ऐतिहासिक दस्तावेजों के रखरखाव के लिए दिसंबर में होगी कार्यशाला
- पेंशन का इतिहास कार्यालय अविभाजित भारत के लाहौर से जुड़ा है
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक के एतिहासिक पेंशन दस्तावेजों को राष्ट्रीय अभिलेखागार में संरक्षित किया जाएगा। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। युद्ध और लिपियों के संबंध में यह अभिलेख शोधार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकेंगे।
अभिलेखागार और पीसीडीए अफसरों की बैठक में यहां के दस्तावेजों को दिल्ली हस्तांतरित करने पर सहमति बन गई है। आने वाले दिसंबर माह में तीन दिवसीय एक कार्यशाला आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है। इसमें कर्मियों को अभिलेखों के रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि ये दस्तावेज सुरक्षित रखे जा सकें।
प्रयागराज स्थित रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (पेंशन) कार्यालय का इतिहास अविभाजित भारत के लाहौर से जुड़ा है। इस कार्यालय में फौज के पेंशन संबंधी दस्तावेज धरोहर की तरह संभाल कर रखे गए हैं। इन अभिलेखों के मूल्यांकन के लिए हाल में ही दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार की सहायक निदेशक कल्पना शुक्ला व आर्काइविस्ट डॉ थिंगनम संजीव की टीम ने पीसीडीए पेंशन कार्यालय का दौरा किया था।
पीसीडीए अफसरों के मुताबिक इन ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेजों को देखकर एनआईए की टीम बहुत प्रभावित हुई है। यहां रखे गए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को राष्ट्रीय अभिलेखागार ले जाने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि इन अभिलेखों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोधार्थी और अन्य जिज्ञासु अध्ययन कर सकें। प्रधान नियंत्रक विश्वजीत सहाय ने इसकी पुष्टि की है।
इससे पहले दस्तावेजों के हस्तांतरण पर एनआईए अफसरों के साथ हुई बैठक में प्रधान नियंत्रक के आलावा नियंत्रक मयंक बिष्ट, संयुक्त नियंत्रक यशस्वी कुमार, उप नियंत्रक अभिषेक सिंह, सहायक नियंत्रक हिमांशु त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। तब उस दौरान भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों को राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली में स्थानांतरित करने की रूपरेखा पर विचार किया गया था।