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म्योहॉल में प्रस्तावित निर्माण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Tue, 12 May 2015 12:08 AM IST
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शहर के स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स म्योहॉल में प्रस्तावित नए निर्माण को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इसके खिलाफ जनहित याचिका दाखिल कर कहा गया है कि म्योहाल की ऐतिहासिक महत्व की इमारत को इससे नुकसान पहुंचेगा। अरविंद एंड्रयू दास द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति मनोज गुप्ता की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका में कहा गया है कि म्योहाल 1889 में बनी ऐतिहासिक इमारत है। इसे बाद में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के रूप में विकसित किया गया। खेल विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अब एक मास्टर प्लान बनाकर म्योहाल में नए भवन बनाने की योजना बनाया है। इसमें बैडमिंटन कोर्ट और दूसरी इमारतें हैं। ऐसा करने से म्योहाल के ऐतिहासिक स्वरूप को नुकसान पहुंचेगा। याची का कहना था कि मानक के अनुसार किसी ऐतिहासिक निर्माण के पचास मीटर की दूरी तक कोई निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। उसके बाद सौ मीटर तक एक मंजिला निर्माण ही हो सकता है। दस वर्ष पूर्व भी यहां स्वीमिंग पूल बनाने का प्रस्ताव था मगर बाद में उसका स्थान बदल दिया गया।
खंडपीठ ने इस पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। सरकार की ओर से बताया गया कि म्योहाल को ऐतिहासिक इमारतों की श्रेणी में नहीं शामिल किया गया है। प्रस्तावित निर्माण से प्राचीन इमारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। खंडपीठ ने सरकार से ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के लिए बने मानक पर जवाब तलब करते हुए नियमानुसार निर्माण करने का निर्देश दिया है।
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याचिका में कहा गया है कि म्योहाल 1889 में बनी ऐतिहासिक इमारत है। इसे बाद में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के रूप में विकसित किया गया। खेल विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अब एक मास्टर प्लान बनाकर म्योहाल में नए भवन बनाने की योजना बनाया है। इसमें बैडमिंटन कोर्ट और दूसरी इमारतें हैं। ऐसा करने से म्योहाल के ऐतिहासिक स्वरूप को नुकसान पहुंचेगा। याची का कहना था कि मानक के अनुसार किसी ऐतिहासिक निर्माण के पचास मीटर की दूरी तक कोई निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। उसके बाद सौ मीटर तक एक मंजिला निर्माण ही हो सकता है। दस वर्ष पूर्व भी यहां स्वीमिंग पूल बनाने का प्रस्ताव था मगर बाद में उसका स्थान बदल दिया गया।
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खंडपीठ ने इस पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। सरकार की ओर से बताया गया कि म्योहाल को ऐतिहासिक इमारतों की श्रेणी में नहीं शामिल किया गया है। प्रस्तावित निर्माण से प्राचीन इमारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। खंडपीठ ने सरकार से ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के लिए बने मानक पर जवाब तलब करते हुए नियमानुसार निर्माण करने का निर्देश दिया है।
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