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मोदी सरकार ने बढ़ाई रेल के कामों की रफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Tue, 12 May 2015 12:07 AM IST
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मोदी सरकार रेल पर सवार होकर बजटीय कामों को रफ्तार देने में जुट गई है। बजट में घोषित तीसरी लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। उम्मीद है कि अगले छह महीने में मथुरा से झांसी और बीना के बीच तीसरी लाइन पर अगले साल कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इलाहाबाद से मुगलसराय के बीच तीसरी लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) का टेंडर भी इसी महीने जारी होने की संभावना है। दावा किया जा रहा है कि यह पहला मौका है कि रेल बजट आने के चार महीने के अंदर एफएलएस के टेंडर जारी हो गए।
उत्तर मध्य रेलवे क्षेत्र की दोनों मुख्य लाइनों पर क्षमता का डेढ़ गुना लोड है। इसके कारण ट्रेनों का परिचालन दुरुस्त नहीं हो पा रहा है। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और नई ट्रेनों को चलाने के लिए नई लाइनों की जरूरत बताई गई है। मोदी सरकार ने क्षमता बढ़ाने के कार्य को चुनौती के रूप में लिया है। अफसरों का दावा है कि सरकार बजट में घोषित दोहरीकरण, तीसरी और चौथी लाइनों के निर्माण कार्य को हर हाल में वर्ष 2016 से शुरू करना चाहती है। ऐसे में फाइनल सर्वे, डीपीआर, कार्यदायी एजेंसी नामित करने में नौ से 10 महीने का वक्त लगने की संभावना है। इसमें ढाई महीने निकल चुके हैं। पहले इसी प्रक्रिया में डेढ़ से दो साल लगते रहे हैं। जून, जुलाई में सर्वे एजेंसी नामित हो जाएगी। फिलहाल, एफएलएस के साथ एजेंसी भूतकनीकी अध्ययन, ड्राइंग आदि भी तैयार करेगी। इसमें तय होगा कि पूरी दूरी में कितने छोटे-बड़े पुल, क्रासिंग, स्टेशन आदि बनेंगे।
इलाहाबाद, इटावा, मुगलसराय और सैंथिया में रेल बाईपास का ऐलान भी रेल बजट में हुआ था। इलाहाबाद में सर्वे भी हो गया है लेकिन भारी-भरकम बजट की आशंका के कारण अब तक इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। बजट में चारों बाईपास की अनुमानित दूरी 35 किमी आंकी गई है लेकिन केवल इलाहाबाद बाईपास ही 20-25 किमी लंबा हो सकता है। सो, इसके एफएलएस की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
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उत्तर मध्य रेलवे क्षेत्र की दोनों मुख्य लाइनों पर क्षमता का डेढ़ गुना लोड है। इसके कारण ट्रेनों का परिचालन दुरुस्त नहीं हो पा रहा है। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और नई ट्रेनों को चलाने के लिए नई लाइनों की जरूरत बताई गई है। मोदी सरकार ने क्षमता बढ़ाने के कार्य को चुनौती के रूप में लिया है। अफसरों का दावा है कि सरकार बजट में घोषित दोहरीकरण, तीसरी और चौथी लाइनों के निर्माण कार्य को हर हाल में वर्ष 2016 से शुरू करना चाहती है। ऐसे में फाइनल सर्वे, डीपीआर, कार्यदायी एजेंसी नामित करने में नौ से 10 महीने का वक्त लगने की संभावना है। इसमें ढाई महीने निकल चुके हैं। पहले इसी प्रक्रिया में डेढ़ से दो साल लगते रहे हैं। जून, जुलाई में सर्वे एजेंसी नामित हो जाएगी। फिलहाल, एफएलएस के साथ एजेंसी भूतकनीकी अध्ययन, ड्राइंग आदि भी तैयार करेगी। इसमें तय होगा कि पूरी दूरी में कितने छोटे-बड़े पुल, क्रासिंग, स्टेशन आदि बनेंगे।
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इलाहाबाद, इटावा, मुगलसराय और सैंथिया में रेल बाईपास का ऐलान भी रेल बजट में हुआ था। इलाहाबाद में सर्वे भी हो गया है लेकिन भारी-भरकम बजट की आशंका के कारण अब तक इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। बजट में चारों बाईपास की अनुमानित दूरी 35 किमी आंकी गई है लेकिन केवल इलाहाबाद बाईपास ही 20-25 किमी लंबा हो सकता है। सो, इसके एफएलएस की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
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