नए पुलिस कमिश्नर बोले : पुलिसिंग को तकनीक-डाटा एनॉलिसिस के जरिये करेंगे बेहतर, व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
पुलिस कमिश्नर ने अपनी योजना साझा की। कहा कि महज छह महीनों बाद महाकुंभ का आयोजन होना है। महाकुंभ में पुलिसिंग अपने नए स्वरूप में और भी बेहतर हो, इसके लिए डाटा एनॉलिसिस व आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
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जनपद के नए पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा पुलिसिंग को नये तेवर में ढालने की प्लानिंग में हैं। इसके लिए वह आधुनिक तकनीक के साथ डाटा एनॉलिसिस का भी सहारा लेंगे। आईजी रेंज लखनऊ रहते हुए वह ऐसा कर चुके हैं और इसका फायदा भी देखने को मिला। ऐसे में इसी प्रयोग के जरिये उन्होंने प्रयागराज की पुलिसिंग को भी बेहतर करने की ठानी है। इसका लाभ महाकुंभ के साथ-साथ सामान्य दिनों में भी मिलेगा।
पुलिस कमिश्नर ने मंगलवार को अपनी योजना साझा की। कहा कि महज छह महीनों बाद महाकुंभ का आयोजन होना है। महाकुंभ में पुलिसिंग अपने नए स्वरूप में और भी बेहतर हो, इसके लिए डाटा एनॉलिसिस व आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। लखनऊ में डाटा एनॉलिसिस के जरिये ही डायल 112 की पीआरवी को उन स्पॉट्स पर लगाया गया, जहां से ज्यादा घटनाएं रिपोर्ट होती थीं।
डाटा एनॉलिसिस से निकले निष्कर्ष से ही थानाें की मोबाइल टीमों को भी कुछ चिह्नित स्थानों पर ज्यादा फोकस रहने को अलर्ट किया गया, जो अपराध के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील थे। इसका काफी फायदा हुआ और पीड़ितों तक मदद पहुंचाने का रिस्पांस टाइम भी और बेहतर हुआ। अब इसी के जरिये प्रयागराज में भी पुलिसिंग को बेहतर किया जाएगा।
पुलिसकर्मियों को दिलाएंगे व्यवहार कुशलता का प्रशिक्षण
फरियादी या पीड़ित के साथ संवेदनशीलतापूर्वक व्यवहार किया जाए, इसके लिए पुलिसकर्मियों को व्यवहार कुशलता का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसका एक फायदा महाकुंभ में भी होगा जब देश-विदेश के श्रद्धालु शहर में आएंगे।
निजी संस्थाओं की मदद से फैलाएंगे जागरूकता
साइबर अपराध के लगातार बढ़ते मामलों पर नए सीपी ने कहा कि शासन इसे लेकर पूरी तरह से गंभीर है और इसी को देखते हुए प्रत्येक जनपदों में साइबर थाने स्थापित किए गए हैं। इनसे बचने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है और इसके लिए जरूरत पड़ी तो निजी संस्थाओं-कंपनियों का भी सहयोग लिया जाएगा।
जानिए नए पुलिस कमिश्नर को
- 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी, मूल रूप से चंडीगढ़ के रहने वाले हैं।
- शिक्षा- बीई इलेक्ट्रॉनिक्स
- फतेहपुर समेत सात जिलों के कप्तान रहे
- सात साल सीबीआई में सेवाएं दीं
- व्यापम घोटाले की जांच करने वाले टीम में भी रहे शामिल
- यूपी के गृह सचिव के बाद बने थी आईजी रेंज लखनऊ