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यूपी : हाईकोर्ट में याचिकाओं की टाइपिंग और फॉर्मेटिंग के लिए नए दिशा-निर्देश जारी
Sat, 31 Oct 2026 05:14 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 31 Oct 2026 05:14 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत में दाखिल होने वाली याचिकाओं, अपीलों, अर्जियों और पुनरीक्षण याचिकाओं की टाइपिंग और फॉर्मेटिंग में एकरूपता लाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत में दाखिल होने वाली याचिकाओं, अपीलों, अर्जियों और पुनरीक्षण याचिकाओं की टाइपिंग और फॉर्मेटिंग में एकरूपता लाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अंग्रेजी में तैयार होने वाली सभी याचिकाओं और अन्य अदालती दस्तावेजों का टेक्स्ट टाइम्स न्यू रोमन फॉन्ट में 14 साइज और डबल लाइन स्पेसिंग के साथ टाइप करना होगा। हिंदी में तैयार दस्तावेजों के लिए यूनिकोड फॉन्ट 14 साइज और डबल लाइन स्पेसिंग अनिवार्य की गई है।
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न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह निर्देश जारी करते हुए कहा कि याचिकाओं में बोल्ड और इटैलिक फॉन्ट का मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। बोल्ड फॉन्ट का प्रयोग केवल संलग्नकों के अंकन या विवरण और इंडेक्स में किया जा सकेगा। वहीं, इटैलिक फॉन्ट का इस्तेमाल केवल याचिका में उद्धृत अंशों और अदालतों अथवा वैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में किया जा सकेगा। प्रार्थना या राहत वाले हिस्से को इटैलिक में लिखने की अनुमति नहीं होगी। नए दिशा-निर्देश 12 नवंबर से लागू होंगे।
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कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग फॉन्ट, फॉन्ट साइज और स्पेसिंग के इस्तेमाल से याचिकाओं को पढ़ने में कठिनाई होती है और न्यायिक रिकॉर्ड की व्यवस्थित प्रस्तुति प्रभावित होती है। इसलिए सभी प्रकार की दाखिल याचिकाओं में एकरूपता लाने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है।
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खंडपीठ ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की प्रति इलाहाबाद स्थित प्रधान पीठ और लखनऊ खंडपीठ के सभी दाखिला एवं स्क्रूटनी अनुभागों को भेजने तथा बार को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार दाखिल दस्तावेजों की जांच 12 नवंबर 2026 से शुरू होगी। साथ ही, इसी याचिका में प्रयागराज नगर निगम के गृहकर निर्धारण से जुड़े मामले में कोर्ट ने नगर आयुक्त को याचिकाकर्ता की शिकायत पर दो महीने के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।