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Prayagraj News: इत्र के कारोबार से महक रहा नेवादा, सुरमा ने भी बनाई पहचान
Sat, 29 Aug 2026 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sat, 29 Aug 2026 01:49 AM IST
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करनाईपुर क्षेत्र के कहली गांव में इत्र और सुरमा खरीदते गांव के लोग ।
- फोटो : Archive
बहरिया क्षेत्र का नेवादा गांव करीब 50 वर्षों से इत्र, सेंट और सुरमा के कारोबार के लिए अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यह कारोबार गांव के कई परिवारों की आजीविका का साधन है। खुशबू और टिकाव की समझ इस कारोबार की चाबी है।
गांव के हमीद समेत अन्य लोग लंबे समय से यह कारोबार करते हैं। उनके पास लोगों की पसंद के अनुसार अलग-अलग खुशबुओं वाले इत्र और सेंट उपलब्ध रहते हैं। पांच दशक से यह कारोबार आसपास के क्षेत्रों में नेवादा के इत्र और सुरमा को मशहूर कर चुका है।
हमीद बरेली से सुरमा और इत्र लाते हैं। वह घर से और फेरी लगाकर इत्र बेचते हैं और हजारों रुपये कमाकर अपना परिवार चलाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कारोबार नेवादा गांव की पहचान बन चुका है।
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गांव के हमीद समेत अन्य लोग लंबे समय से यह कारोबार करते हैं। उनके पास लोगों की पसंद के अनुसार अलग-अलग खुशबुओं वाले इत्र और सेंट उपलब्ध रहते हैं। पांच दशक से यह कारोबार आसपास के क्षेत्रों में नेवादा के इत्र और सुरमा को मशहूर कर चुका है।
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हमीद बरेली से सुरमा और इत्र लाते हैं। वह घर से और फेरी लगाकर इत्र बेचते हैं और हजारों रुपये कमाकर अपना परिवार चलाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कारोबार नेवादा गांव की पहचान बन चुका है।
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