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NEET Paper Leak : डॉक्टर के बेटे ने चार लाख में की थी डील, एक लाख दिए थे एडवांस

Sat, 29 Jun 2024 11:45 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 29 Jun 2024 11:45 AM IST
सार

राज पांडेय नैनी के एडीए काॅलोनी में अक्षयवट हॉस्पिटल के संचालक डॉ. आरपी पांडेय का बेटा है। उसने नीट के लिए आवेदन किया था और पांच मई को बिहार के जनपद मुजफ्फरपुर में मिठनपुरा थाना क्षेत्र स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल मालीघाट में उसकी जगह परीक्षा देते सॉल्वर पकड़ा गया था।

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NEET Paper Leak: Doctor's son had made a deal for four lakhs, gave one lakh advance
अमर उजाला। - फोटो : ANI

विस्तार

नीट में अपनी जगह पर सॉल्वर बैठाने के मामले में नैनी स्थित अक्षयवट हॉस्पिटल के संचालक के बेटे ने चार लाख रुपये में डील की थी। उसने परीक्षा पास कराने के लिए सॉल्वर को चार लाख रुपये देने का वादा किया था। एक लाख रुपये एडवांस भी दिए थे। हालांकि परीक्षा के दौरान ही फर्जीवाड़ा पकड़ लिया गया। फिलहाल सॉल्वर के साथ ही डॉक्टर के बेटे की तलाश में भी बिहार पुलिस जुटी हुई है।

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राज पांडेय नैनी के एडीए काॅलोनी में अक्षयवट हॉस्पिटल के संचालक डॉ. आरपी पांडेय का बेटा है। उसने नीट के लिए आवेदन किया था और पांच मई को बिहार के जनपद मुजफ्फरपुर में मिठनपुरा थाना क्षेत्र स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल मालीघाट में उसकी जगह परीक्षा देते सॉल्वर पकड़ा गया था।
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यह सॉल्वर जोधपुर एम्स में एमबीबीएस 2021 बैच तृतीय वर्ष का छात्र हुकमा राम निवासी राजस्थान था। सूत्रों का कहना है कि उसने पूछताछ में केंद्र प्रबंधन के सामने यह खुलासा किया था कि राज ने उसे परीक्षा पास कराने के लिए चार लाख रुपये देने की डील की थी। इसमें से एक लाख रुपये एडवांस भी दिए थे। उसने यह भी लिखित बयान दिया था कि राज पटना का निवासी है और वह उससे कोटा में मिला था।

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डॉक्टर परिवार के एक करीबी का दावा है कि उनके बेटे राज ने कुछ समय तक कोटा में रहकर नीट की तैयारी की है। उसका पटना भी आना जाना लगा रहता था। संभव है कि उसने उसे अपना तत्कालीन पता पटना ही बताया हो। फिलहाल बिहार पुलिस दोनों की तलाश में लगी हुई है। उधर डॉक्टर भी लापता हैं। उनका नंबर शुक्रवार को भी बंद रहा। इस संबंध में जब हॉस्पिटल मैनेजर केके शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह बाहर हैं और बाद में बात करेंगे।

परीक्षा केंद्र प्रबंधन की भूमिका की भी जांच

बिहार पुलिस राज व सॉल्वर की तलाश करने के साथ परीक्षा केंद्र प्रबंधन की भूमिका की भी जांच में जुटा है। दरअसल जांच में यह बात भी सामने आई है कि फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद भी सॉल्वर को परीक्षा देने का मौका दिया गया। बायोमीट्रिक मिलान के दौरान ही यह साफ हो गया था कि वह मूल अभ्यर्थी नहीं है। इस प्रकरण की सूचना पर पहुंचे मिठनपुरा थाने के पुलिसकर्मी रामकृष्ण परमंस की ओर से लिखित बयान दिया गया है कि कहने के बावजूद केंद्र प्रबंधन ने मौके से जब्त सामान व सॉल्वर को उन्हें नहीं सौंपा। एफआईआर दर्ज कराने की बात से भी मना कर दिया। साथ ही बाद में सॉल्वर को भी छोड़ दिया।

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