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यूपी बोर्ड अपनाएगा एनसीईआरटी की किताबें
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 01 Jun 2017 02:04 AM IST
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यूपी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों से पढ़ाई करके निकलने वाले छात्र-छात्राओं को आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में काफी आसानी होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों को बेहद अहम माना जाता है, सो यूपी बोर्ड ने अगले सत्र से विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रमुख सचिव माध्यमिक के आठ मई के आदेश के बाद यूपी बोर्ड ने प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है। इस संबंध में पिछले दिनों माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक को पत्र भी लिखा है।
यूपी बोर्ड के उच्चाधिकारियों के मुताबिक सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम अप्रैल 2018 से शुरू होने वाले सत्र में लागू होगा। यूपी बोर्ड के विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की योजना पर काम वर्ष 2016 से चल रहा है। बोर्ड जुलाई 2017 से शुरू हो रहे सत्र में इस पाठ्यक्रम को लागू करने की तैयारी में था लेकिन नौ से 12 तक की कक्षाओं में विद्यार्थियों की भारी संख्या और उसके हिसाब से समय पर किताबें प्रकाशित करा पाना संभव न हो पाने के कारण अगले शैक्षिक सत्र से इसे लागू करने की तैयारी है।
यूपी बोर्ड के विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की योजना खासतौर से इसलिए भी बनाई है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों की तैयारी प्रारंभिक स्तर से ही हो सके। ऐसा इसलिए भी कि एनसीईआरटी की किताबों की शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा भी एनसीईआरटी की किताबों को ही प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इन परीक्षाओं में काफी सवाल एनसीईआरटी के पाठ्यक्रमों से शामिल किए जाते हैं। यूपी बोर्ड में एनसीईआरटी की किताबों को शामिल करने का दूसरा बड़ा कारण केंद्र सरकार की मंशा के तहत देशभर के सभी बोर्ड में एक सामान शिक्षा करने की योजना से भी है।
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एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू होने पर किताबें कैसे उपलब्ध होंगी, इस पर फैसला होना बाकी है। शिक्षा निदेशक ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक को लिखे पत्र में एनसीईआरटी से पुस्तकों के संबंध में निर्णय लेने की अपेक्षा की है। उन्होंने विकल्प भी बताए हैं। इसके तहत एनसीईआरटी से स्वयं पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध का विकल्प रखा गया है। दूसरा विकल्प यह है कि एनसीईआरटी से पुस्तकों की कॉपीराइट प्राप्त कर निजी मुद्रकों से किताबें प्रकाशित कराई जाएं। इस प्रक्रिया में एनसीईआरटी को रॉयल्टी के भुगतान के साथ पुस्तक प्रकाशन का लाइसेंस भी लेना होगा।
यूपी बोर्ड के विद्यालयों में नया पाठ्यक्रम लागू होने के बाद गरीब विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबें नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। नि:शुल्क किताबें राजकीय इंटर कॉलेज एवं सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों को मिलेगी जिनका परिवार बीपीएल योजना में शामिल होगा।
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यूपी बोर्ड के उच्चाधिकारियों के मुताबिक सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम अप्रैल 2018 से शुरू होने वाले सत्र में लागू होगा। यूपी बोर्ड के विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की योजना पर काम वर्ष 2016 से चल रहा है। बोर्ड जुलाई 2017 से शुरू हो रहे सत्र में इस पाठ्यक्रम को लागू करने की तैयारी में था लेकिन नौ से 12 तक की कक्षाओं में विद्यार्थियों की भारी संख्या और उसके हिसाब से समय पर किताबें प्रकाशित करा पाना संभव न हो पाने के कारण अगले शैक्षिक सत्र से इसे लागू करने की तैयारी है।
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यूपी बोर्ड के विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की योजना खासतौर से इसलिए भी बनाई है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों की तैयारी प्रारंभिक स्तर से ही हो सके। ऐसा इसलिए भी कि एनसीईआरटी की किताबों की शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा भी एनसीईआरटी की किताबों को ही प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इन परीक्षाओं में काफी सवाल एनसीईआरटी के पाठ्यक्रमों से शामिल किए जाते हैं। यूपी बोर्ड में एनसीईआरटी की किताबों को शामिल करने का दूसरा बड़ा कारण केंद्र सरकार की मंशा के तहत देशभर के सभी बोर्ड में एक सामान शिक्षा करने की योजना से भी है।
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एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू होने पर किताबें कैसे उपलब्ध होंगी, इस पर फैसला होना बाकी है। शिक्षा निदेशक ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक को लिखे पत्र में एनसीईआरटी से पुस्तकों के संबंध में निर्णय लेने की अपेक्षा की है। उन्होंने विकल्प भी बताए हैं। इसके तहत एनसीईआरटी से स्वयं पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध का विकल्प रखा गया है। दूसरा विकल्प यह है कि एनसीईआरटी से पुस्तकों की कॉपीराइट प्राप्त कर निजी मुद्रकों से किताबें प्रकाशित कराई जाएं। इस प्रक्रिया में एनसीईआरटी को रॉयल्टी के भुगतान के साथ पुस्तक प्रकाशन का लाइसेंस भी लेना होगा।
यूपी बोर्ड के विद्यालयों में नया पाठ्यक्रम लागू होने के बाद गरीब विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबें नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। नि:शुल्क किताबें राजकीय इंटर कॉलेज एवं सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों को मिलेगी जिनका परिवार बीपीएल योजना में शामिल होगा।