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NAVRATRI 2021 : घर-मंदिर घट स्थापना संग आशीष देने आईं देवी, शारदीय नवरात्रि पर सजे सिद्धपीठ

Fri, 08 Oct 2021 12:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 08 Oct 2021 12:57 PM IST
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NAVRATRI 2021: Maa Bhagwati comes to bless with ghar-mandir ghat sthapana, Siddhapeeth decorated on Shardiya Navratri
शारदीय नवरात्रि 2021 - फोटो : अमर उजाला
आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के साथ बृहस्पतिवार से देवी आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ हुआ। घरों से लेकर देवी मंदिरों, शक्तिपीठों, सिद्धपीठों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तय मुहूर्त में कलश स्थापना की गई। भोर से लेकर रात तक देवी के प्रथम शैलपुत्री स्वरूप का दर्शन-पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं के आने का क्रम बना रहा। सामूहिक रूप से घरों और शक्तिपीठों में महिलाओं की टोली ने भजन और कीर्तन करके देवी की
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महिमा बखानी।

मंदिरों के करीब फूल-माला, नारियल-चुनरी, प्रसाद बेचने वालों की दुकानों की कतारें लगीं तो शक्तिपीठों की ओर जाने वाले रास्तों पर भी देवीगीतों की गूंज रही। मीरापुर स्थित सिद्धपीठ मां ललिता देवी मंदिर में पं. शिवमूरत मिश्र के आचार्यत्व में कलश स्थापना के साथ  वनिर्मित भव्य चांदी के दरबार में समिति के संरक्षक संजीव अग्रवाल ने सपत्नीक पूजा अर्चन किया।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा तथा महामंत्री धीरज नागर की देखरेख में भोर में मंगला आरती केबाद से ही दर्शन-पूजन का क्रम आरंभ हुआ जो देर रात तक जारी रहा। इस बीच मंदिर में दुर्गा सप्तशती पाठ, शतचंडी पाठ भी हुए। देवी का फूलों और आभूषणों से शैलपुत्री स्वरूप में शृंगार किया गया। परंपरानुसार पहले दिन बृषभान सिंह एवं पार्टी की ओर से मंदिर परिसर में भगवती जागरण के तहत देवी गीतों की धूम रही। कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत-भजन सुनाकर देवी की महिमा बखानी और श्रद्धालुओं को आनंदित किया।
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व्यवस्था में पीसी वर्मा, कमलेश श्रीवास्तव, हरीश खरे आदि जुटे रहे। सिद्धपीठ कल्याणी देवी मंदिर में भी पुजारी श्याम जी पाठक की देखरेख में भगवती का फूलों और आभूषणों से भव्य शृंगार किया गया। भोर से देवी के पूजन और शाम से शृंगार दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के आने का क्रम बना रहा। कलश स्थापना के बाद शतचंडी पाठ, दुर्गा सप्तशती पाठ हुए।

शैल पुत्री स्वरूप में देवी की झांकी सजाई गई। अलोपीबाग स्थित शक्तिपीठ अलोपशंकरी में दर्शन और अभिषेक के लिए होड़ मची रही। भोर से ही आरंभ दर्शन का क्रम दोपहर और फिर शाम से लेकर रात तक जारी रहा। मंदिर परिसर में भगवती को निशान चढ़ाने केलिए प्रयागराज के इर्द-गिर्द क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचे। अबूझ मुहूर्त होने से परिसर में बच्चों के मुंडन, कर्णछेदन कराए गए। 


नवदुर्गा स्वरूप में सजीं खेमामाई
चौक गंगादास स्थित शक्तिस्वरूपा खेमामाई मंदिर में कंचन मालवीय की देखरेख में भगवती नवदुर्गा स्वरूप में सजीं। परिसर में महिला मंडली की ओर से भजन-कीर्तन किया गया। देवी का दरबार बिजली की रंगीन झालरों और फूलों से सजाया गया। वहीं सिविल लाइंस हनुमत निकेतन की देवी दुर्गा, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर की अष्टभुजी देवी, पानी टंकी मंदिर की अष्टभुजी देवी, कटरा कालीबाड़ी, कर्नलगंज कालीबाड़ी, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, सिविल लाइंस स्थित सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ सहित अन्य देवी मंदिरों में देवी के दर्शन और पूजन, नारियल-चुनरी चढ़ाने के लिए लोग देर रात तक आते रहे।
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