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महिलाओं के बिना राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं: न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान
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परेड ग्राउंड में रविवार को मातृशक्ति महासंगम में महिलाओं ने ताकत दिखाई। दीप जलाकर उत्सव मनाया और राम के भजनों से वातावरण को राममय कर दिया। विश्व हिंदू परिषद के शिविर भाजपा समन्वय विभाग की ओर से आयोजित इस संमागम में आईं बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने कहा कि महिलाओं के बिना राष्ट्र निर्माण संभव नहीं है। महिलाओं ने संकल्प लिया कि वह राष्ट्र निर्माण में अपना अहम योगदान देंगी। यह महासंगम तीन सत्र में किया गया।
प्रथम सत्र में भारतीय चिंतन में महिला विषयक परिचर्चा में दृष्टि अध्ययन प्रबोधन केंद्र पुणे की संस्थापक सचिव डॉ. अंजलि विश्वास ने कहा कि इस युग में महिलाओं का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। महिला और पुरुष एक समान हैं। ईश्वर ने सभी महिलाओं को इतनी शक्ति दी है कि वह अपने हक की स्वयं लड़ाई लड़ सकें।
दूसरे सत्र में भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें विश्व मांगल्य छात्रसभा की अखिल भारतीय संघटक डॉ. श्रुति देशपांडे ने कहा कि महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम जब केवट की नाव में सवार होने लगे तब उन्होंने पहले सीता को नाव में बिठाया था।
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तीसरे सत्र में बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने बताया कि हर हाल में पीसीएस जे का परिणाम आया है। उसमें 70 फीसदी लड़कियों ने बाजी मारी है। साथ ही यह ध्यान रखें कि महिलाओं को कभी अपने संस्कार नहीं भूलना चाहिए। किसी भी शास्त्र में नहीं लिखा है कि खाना और बर्तन सिर्फ महिलाएं ही बनाएंगी। महिलाओं को अपनी ताकत पहचानने की जरूरत है।
अंत में पद्मश्री डॉ. राज बवेजा, डॉ. सरोज धींगरा, शिवानी, सुभाष राठी, प्रतिभा श्रीवास्तव, अनुराधा, मधु यादव, अंजलि विशाल, राधा रानी को सम्मानित किया गया। महिलाओं ने पंडाल में दीया जलाया और मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, मेरे राम आएंगे...गीत गाकर सबको मंत्रमुग्ध किया।
संयोजिका डॉ. कीर्तिका अग्रवाल ने सभी अतिथियों और महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि नारी जीवन की सर्जक, राष्ट्र की मार्गदर्शक, समाज का विकास और परिवार को संभालने वाली मातृ शक्तियों ने एहसास करा दिया है कि वह सबकुछ कर सकती हैं। संचालन रंजना त्रिपाठी ने किया। प्रदर्शनी में महिलाओं ने हाथ से बुने हुए छोटे बच्चों का स्वेटर, हैंडमेड गले का हार व चूड़ी का स्टॉल लगाया गया।
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प्रथम सत्र में भारतीय चिंतन में महिला विषयक परिचर्चा में दृष्टि अध्ययन प्रबोधन केंद्र पुणे की संस्थापक सचिव डॉ. अंजलि विश्वास ने कहा कि इस युग में महिलाओं का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। महिला और पुरुष एक समान हैं। ईश्वर ने सभी महिलाओं को इतनी शक्ति दी है कि वह अपने हक की स्वयं लड़ाई लड़ सकें।
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दूसरे सत्र में भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें विश्व मांगल्य छात्रसभा की अखिल भारतीय संघटक डॉ. श्रुति देशपांडे ने कहा कि महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम जब केवट की नाव में सवार होने लगे तब उन्होंने पहले सीता को नाव में बिठाया था।
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तीसरे सत्र में बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने बताया कि हर हाल में पीसीएस जे का परिणाम आया है। उसमें 70 फीसदी लड़कियों ने बाजी मारी है। साथ ही यह ध्यान रखें कि महिलाओं को कभी अपने संस्कार नहीं भूलना चाहिए। किसी भी शास्त्र में नहीं लिखा है कि खाना और बर्तन सिर्फ महिलाएं ही बनाएंगी। महिलाओं को अपनी ताकत पहचानने की जरूरत है।
अंत में पद्मश्री डॉ. राज बवेजा, डॉ. सरोज धींगरा, शिवानी, सुभाष राठी, प्रतिभा श्रीवास्तव, अनुराधा, मधु यादव, अंजलि विशाल, राधा रानी को सम्मानित किया गया। महिलाओं ने पंडाल में दीया जलाया और मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, मेरे राम आएंगे...गीत गाकर सबको मंत्रमुग्ध किया।
संयोजिका डॉ. कीर्तिका अग्रवाल ने सभी अतिथियों और महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि नारी जीवन की सर्जक, राष्ट्र की मार्गदर्शक, समाज का विकास और परिवार को संभालने वाली मातृ शक्तियों ने एहसास करा दिया है कि वह सबकुछ कर सकती हैं। संचालन रंजना त्रिपाठी ने किया। प्रदर्शनी में महिलाओं ने हाथ से बुने हुए छोटे बच्चों का स्वेटर, हैंडमेड गले का हार व चूड़ी का स्टॉल लगाया गया।