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राम मंदिर के सामने मस्जिद भी बनवाना चाहते थे नरसिम्हा राव: निश्चलानंद

Sat, 19 Dec 2020 01:07 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 19 Dec 2020 01:07 AM IST
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Narasimha Rao also wanted to build a mosque in front of Ram temple: Nischalananda
prayagraj news : स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : prayagraj

गोवर्धन पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने शुक्रवार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर नया खुलासा किया। उन्होंने बताया कि नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री रहते समय अगर रामालय ट्रस्ट पर उन्होंने हस्ताक्षर कर दिया होता, तो अब तक मंदिर के सामने मस्जिद भी बन गई होती। नरसिम्हा राव चाहते थे कि मंदिर और मस्जिद दोनों का अगल-बगल या फिर आमने-सामने निर्माण हो जाए। कहा कि कहा कि काशी और मथुरा पर अब कोई बात नहीं कर रहा है। क्योंकि लोगों को पता है कि इस पर बात हुई तो उत्तर प्रदेश में ही तीन पाकिस्तान बन जाएंगे।

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शुक्रवार को नई झूंसी स्थित शिव गंगा आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में स्वामी निश्चलानंद ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि नरसिम्हा राव केसमय तीन शंकराचार्यों और वैष्णवाचार्यों ने रामालय ट्रस्ट पर हस्ताक्षर कर दिया था, लेकिन पुरी के शंकराचार्य की असहमति की वजह से उन्हें पीछे हटना पड़ा था। अयोध्या में हाल में राम मंदिर के शिलान्यास में न आने के सवाल पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि भूमि पूजन में किसको शामिल होना था, यह सभी जानते हैं।

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Narasimha Rao also wanted to build a mosque in front of Ram temple: Nischalananda
prayagraj news : स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : prayagraj
शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। बताया कि बताया कि 45 मिनट तक जब वह बाल-गोपाल की तरह उनके पास बैठे थे, तभी उनको परख लिया था। प्रधानमंत्री अपने नमन, दमन और मिलन के गुणों के बल पर ही पूरे विश्व को मोहित किए हुए हैं। उन्होंने अयोध्या में मेरे शिष्य से ही शिलान्यास का पूूजन कराया। किसान आंदोलन को लेकर किए गए सवाल पर उन्होंने कहा कि जब तक सनातन व्यवस्था के साथ शासनतंत्र नहीं होगा, तब तक शिक्षा, रक्षा, अर्थ और सेवा के प्रकल्प हमेशा असंतुलित रहेंगे। इस मौके पर संतोष त्रिपाठी, ब्रिगेडियर नीरज शुक्ल, हृदयेश शुक्ल, दुर्गा पांडेय, मनोज शुक्ल, राजीव भरद्वाज, अशोक शुक्ल, प्रशांत मिश्रा, सत्यम शुक्ल, शिव शंकर, आचार्य रमाशंकर शुक्ल मौजूद थे।
 

गंगा में बढ़ते प्रदूषण पर शंकराचार्य ने जताई चिंता

गंगा में प्रदूषण को लेकर पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गंगोत्री के बाद गंगा की धारा को समाप्त कर दिया गया है। गंगा उत्तराखंड में ही लुप्त हो गई है। इस वजह से आगे गंगा जल आ ही नहीं रहा है।
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