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कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हटाए जा सकते नगर पंचायत अध्यक्ष : हाईकोर्ट
Thu, 29 Oct 2020 10:14 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 29 Oct 2020 10:14 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी निर्वाचित व्यक्ति को पद से हटाने की प्रक्रिया कानून में निर्धारित की गई है। इसका पालन करके ही उसे पद से हटाया जा सकता है। कोर्ट ने रामपुर के मसवासी नगर पंचायत के अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है । कोर्ट ने कहा है कि जनता की ओर से चुने हुए किसी भी प्रतिनिधि को पद से हटाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए पंचायत सदस्य याची को कानूनी प्रक्रिया अपनाने की छूट दी है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति डा.वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने नगर पंचायत सदस्य महेश चंद्र भारद्वाज की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने ठेकों के आवंटन एवं विकास कार्यो में भारी वित्तीय अनियमितता की है, जिसकी जांच रिपोर्ट आ चुकी है। इसके बावजूद वह पद पर बने हुए हैं। घोटाले रोकने के लिए उन्हें पद से हटाया जाए।
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सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 48 में चुने हुए पंचायत अध्यक्ष को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया दी गई है। ऐसे में याचिका पोषणीय नहीं है, खारिज की जाए।
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कोर्ट ने संविधान के 74वें संशोधन से स्थानीय चुनी हुई जनतांत्रिक सरकार के उपबंधों एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान की मंशा निचले स्तर पर जनतंत्र को लागू करने की है। संविधान संशोधन से लोकल सेल्फ गवर्नमेंट की परिकल्पना को साकार करने का सिस्टम बनाया गया है। पंचायत राज को सांविधानिक दर्जा दिया गया है। चुने हुए प्रतिनिधि को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया दी गयी है। ऐसे में कानून के तहत ही किसी को पद से हटाया जा सकता है। प्रशासनिक आदेश से नहीं। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।