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मुहर्रमः बत्तियां बुझाकर मना शामे गरीबां
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Muharram
- फोटो : CITY DESK
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बुलंद हुईं ‘हाय सकीना-हाय प्यास’ की सदाएं
प्रयागराज। करबला में शहादत के बाद वीरान हुए सहरा की दर्द भरी रात की यादें भी दसवीं मुहर्रम को ताजा हुईं। रानीमंडी, दरियाबाद में शामे गरीबां की मजलिस हुई। ‘हाय सकीना-हाय प्यास’ की सदा बुलंद करते हुए जुलूस निकाला गया। काजमी लाज में असगर अली की ओर से हुए मजलिस के बाद बच्चियों ने हाथ में जलती मशाल लेकर हाय सकीना, हाय प्यास की सदा बुलंद की। हजरत इमाम हुसैन के वफादार घोड़े की शबीह भी निकाली गई।
वहीं दरियाबाद मे बैतुल हामेदीन में शामे गरीबां की बड़ी मजलिस को मौलाना सैयद रजी हैदर ने खिताब करते हुए उस रात का मंजर बयां किया। इन मजलिसों में मौलाना आमिरुर रिजवी, हसन नकवी, रौनक सफीपुरी, मिर्जा कासिम, अली, गौहर, सैयद मोहम्मद अस्करी, नजीब इलाहाबादी आदि शामिल थे।
खिचड़ी खाकर फाका शिकनी
शामे गरीबां से पहले अजादारों ने दिन भर के फाके को खिचड़ी खाकर तोड़ा। पानी-शरबत की सबील लगाकर भी इमाम हुसैन की प्यास को याद किया गया।
दिया स्वच्छता अपनाओ का संदेश
अवाम सेवा समिति की ओर से अध्यक्ष मोहम्मद अबरार के नेतृत्व में स्वच्छता का अभियान चलाया गया। लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक रहने का महत्व बताया गया। कहा, गया घरों में पानी ढंककर रखें। स्वच्छता से इंसान निरोग रहता है। अभियान में ताजा अहमद, उसमान अहमद, निश्चल खरे, मोहम्मद गुफरान, शकील अहमद, बिलाल अहमद, सोनू, गौरव, जुल्फिकार, मंसूर अली आदि शामिल थे।
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जैक सेवा ट्रस्ट ने बिछुड़े बच्चों को मिलाया
दसवीं मुहर्रम पर निकले जुलूसों के मद्देनजर कई संस्थाओं की ओर से नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाए गए। जैक सेवा ट्रस्ट की ओर से हिम्मतगंज में सिराज खान, महमूद खान, आरपी सिन्हा, अशोक सिंह, नियाज खां, अयान खां, शिवचंद्र आदि की देखरेख में अकीदतमंदों के बीच बिस्किट पानी आदि बांटा गया। साथ ही भूले भटके लोगों को रास्ता भी बताया गया।
खाने-पीने के ठेले लगे, खेल-खिलौने भी
जुलूस में शामिल युवकों, बच्चों ने हाथ में छोटे-छोटे तलवार लेने के साथ ही माथे पर हरी-लाल पट्टियां बांध रखी थीं। करबला की ओर जाने वाले रास्ते के दोनों ओर ठेलों पर ऐसी पट्टियां और तलवारें बिकीं। करबला के पास बच्चों के खेल-खिलौनों और खाने-पीने की चीजों के ठेले भी लगे।
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प्रयागराज। करबला में शहादत के बाद वीरान हुए सहरा की दर्द भरी रात की यादें भी दसवीं मुहर्रम को ताजा हुईं। रानीमंडी, दरियाबाद में शामे गरीबां की मजलिस हुई। ‘हाय सकीना-हाय प्यास’ की सदा बुलंद करते हुए जुलूस निकाला गया। काजमी लाज में असगर अली की ओर से हुए मजलिस के बाद बच्चियों ने हाथ में जलती मशाल लेकर हाय सकीना, हाय प्यास की सदा बुलंद की। हजरत इमाम हुसैन के वफादार घोड़े की शबीह भी निकाली गई।
वहीं दरियाबाद मे बैतुल हामेदीन में शामे गरीबां की बड़ी मजलिस को मौलाना सैयद रजी हैदर ने खिताब करते हुए उस रात का मंजर बयां किया। इन मजलिसों में मौलाना आमिरुर रिजवी, हसन नकवी, रौनक सफीपुरी, मिर्जा कासिम, अली, गौहर, सैयद मोहम्मद अस्करी, नजीब इलाहाबादी आदि शामिल थे।
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खिचड़ी खाकर फाका शिकनी
शामे गरीबां से पहले अजादारों ने दिन भर के फाके को खिचड़ी खाकर तोड़ा। पानी-शरबत की सबील लगाकर भी इमाम हुसैन की प्यास को याद किया गया।
दिया स्वच्छता अपनाओ का संदेश
अवाम सेवा समिति की ओर से अध्यक्ष मोहम्मद अबरार के नेतृत्व में स्वच्छता का अभियान चलाया गया। लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक रहने का महत्व बताया गया। कहा, गया घरों में पानी ढंककर रखें। स्वच्छता से इंसान निरोग रहता है। अभियान में ताजा अहमद, उसमान अहमद, निश्चल खरे, मोहम्मद गुफरान, शकील अहमद, बिलाल अहमद, सोनू, गौरव, जुल्फिकार, मंसूर अली आदि शामिल थे।
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जैक सेवा ट्रस्ट ने बिछुड़े बच्चों को मिलाया
दसवीं मुहर्रम पर निकले जुलूसों के मद्देनजर कई संस्थाओं की ओर से नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाए गए। जैक सेवा ट्रस्ट की ओर से हिम्मतगंज में सिराज खान, महमूद खान, आरपी सिन्हा, अशोक सिंह, नियाज खां, अयान खां, शिवचंद्र आदि की देखरेख में अकीदतमंदों के बीच बिस्किट पानी आदि बांटा गया। साथ ही भूले भटके लोगों को रास्ता भी बताया गया।
खाने-पीने के ठेले लगे, खेल-खिलौने भी
जुलूस में शामिल युवकों, बच्चों ने हाथ में छोटे-छोटे तलवार लेने के साथ ही माथे पर हरी-लाल पट्टियां बांध रखी थीं। करबला की ओर जाने वाले रास्ते के दोनों ओर ठेलों पर ऐसी पट्टियां और तलवारें बिकीं। करबला के पास बच्चों के खेल-खिलौनों और खाने-पीने की चीजों के ठेले भी लगे।