प्रयागराज : मां बोली-शिक्षिका की प्रताड़ना से ही बेटी ने लगाई थी फांसी, पुलिस नहीं लिख रही एफआईआर
शिक्षिका ने फोन पर बेइज्जत करते हुए स्कूल से निकलवा देने की धमकी दी थी। इससे सहमी बेटी ने 8 सितंबर को घर पर फांसी लगा ली थी। बाद में, उन्हें स्कूल बुलाकर समझौते का दबाव डाला गया। बृहस्पतिवार को वह स्कूल गईं, लेकिन पुलिस बुलाकर लौटा दिया गया। उन्होंने शिक्षिका पर कार्रवाई की मांग की है।
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मैरी वानामेकर गर्ल्स इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा पलक की मां शिखा जयसवाल ने चुप्पी तोड़ते हुए बेटी की मौत के लिए स्कूल शिक्षिका को ही जिम्मेदार ठहराया है। उनके मुताबिक शिक्षिका ने फोन पर बेइज्जत करते हुए स्कूल से निकलवा देने की धमकी दी थी। इससे सहमी बेटी ने 8 सितंबर को घर पर फांसी लगा ली थी। बाद में, उन्हें स्कूल बुलाकर समझौते का दबाव डाला गया। बृहस्पतिवार को वह स्कूल गईं, लेकिन पुलिस बुलाकर लौटा दिया गया। उन्होंने शिक्षिका पर कार्रवाई की मांग की है।
राजापुर के सर्कुलर रोड निवासी पलक की मां शिखा व पिता लवकुश जयसवाल को चपरासी ने गेट पर ही रोक दिया था। बकौल शिखा, करीब घंटे भर बाद स्कूल प्रबंधन ने पुलिस बुला ली और उन्हें घर भिजवा दिया। पलक ने बीते शुक्रवार को शिक्षिका के डांस का वीडियो अपने मोबाइल फोन के स्टेटस पर लगा लिया था। इस पर शिक्षिका ने फाेन करके नाम कटवा देने व और कहीं दाखिला न होने देने की धमकी दी थी। इसके आहत बेटी ने जान दे दी।
पिता ने बताया कि बेटी की मौत के दूसरे दिन राजापुर चाैकी इंचार्ज के बुलावे पर वह पत्नी व सास के साथ बेटी के स्कूल गए थे। वहां प्रिंसिपल के कमरे में ले जाने से पहले उनके फोन रखवा लिए गए। समझौते का दवाब डाला गया। शिक्षिका के पति ने ले-देकर मामला खत्म करने का लालच दिया। उन्होंने कैंट थाने में तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। एसीपी श्वेताभ पांडेय का कहना है कि दरोगा पर आरोप गलत है। बाकी आरोपों पर इंस्पेक्टर जांच कर रहे हैं।
शिक्षिका से एक मिनट 16 सेकेंड हुई थी बात
शिखा की मकान मालकिन सविता ने बताया कि 8 सितंबर को पलक घर पर अकेली थी। मां के कहने पर उन्होंने अपने फोन से करीब साढ़े 11 बजे पलक की बात उसकी शिक्षिका से कराई थी। एक मिनट 16 सेकेंड की बातचीत में पलक सिर्फ यस मैम, नो मैम और सॉरी मैम ही कहती रही। कॉल कटने पर पलक फोन लौटाकर अपने कमरे में चली गई। करीब एक बजे उसका छोटा भाई स्कूल से लौटा तो वह फंदे पर लटकी तड़पती दिखी। भाई की चीख सुनकर वह अपने पति के साथ कमरे में पहुंचीं और तुरंत उतारा। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी पलक
पढ़ाई में होशियार पलक पहले डॉक्टर बनना चाहती थी। किसी से उसे मालूम चला कि इस पढ़ाई में खर्च बहुत आता है तो उसने विचार त्याग दिया। फिर, उसने पुलिस अधिकारी बनने की ठानी। डबडबाई आंखें लिए शिखा बताती हैं कि बेटी कहती थी कि उनका सारा जीवन दूसरों के घर चौका-बर्तन करते हुए बीत रहा है। जब वह बड़ी हो जाएगी तो यह सब करने की जरूरत नहीं रहेगी। एक अच्छा घर बनाएंगे, जहां सारी सुख-सुविधाएं होंगी। बेटी के साथ अब सारे अरमान भी खत्म हो गए।