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अलविदा व ईद पर भी अब नहीं खुलेंगे मस्जिदों के ताले
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mosque locks will not open on goodbye prayers and eid
- फोटो : CITY DESK
अलविदा व ईद पर मस्जिदों के ताले खुलने की उम्मीदें लॉकडाउन की अविध बढ़ने से टूट गई हैं। रोजेदार और मौलाना, हाफिज लगातार अल्लाह से दुआएं कर रहे थे कि महामारी का प्रकोप कम हो और अलविदा पर मस्जिदों में नमाज अदा करने का मौका मिल जाए। लेकिन, लॉकडाउन बढ़ने की वजह से अब धर्मगुरुओं ने अलविदा और ईद पर घरों में ही रहकर इबादत करने की अपील शुरू कर दी है।
इस्लामिक धर्मगुरुओं के मुताबिक की अलविदा और ईद पर नमाज की मान्यता मस्जिदों से ही है। लेकिन इस बार के हालात कोरोना महामारी के संक्रमण की वजह से कुच और ही हैं। कहीं भी भीड़ या जमात मेें खड़े होने पर रोक है। ऐसे में ईद की नमाज पर इस बार मस्जिदों में उतने ही लोग प्रवेश कर सकेंगे, जिन्हें प्रशासन अनुमति देगा। मान्यता के अनुसार रमजान की बड़ी फजीलत है और हदीस शरीफ में देखा जाए तो इस महीने में नेकियोें और रहमतों की बारिश होती है। अल्लाह ताला तीसरे असरे में बंदों की हर इबादत कबूल कर लेता है। चौदहो पीर के सज्जादानशीन सुल्तान अहमद बताते हैं कि रमजान रम्ज से बना है।
इस महीने में रोजा रखने और इबादत करने से हर तरह के कष्टों, गुनाहों और बलाओं को जलाया जा सकता है। इस बार के रमजान की इबादत से पूरी उम्मीद है कि अल्लाह ताला कोरोना महामारी को जलाकर नष्ट कर देगा। रही बात अलविदा और ईद के नमाज ीक तो कोरोना के संक्रमण के दौर में बचाव के जो भी तरीके सरकार अपना रही है, उसका स्वागत है। महामारी से बचने के लिए लॉकडाउन के अलावा कोई और तरीका या रास्ता नहीं बचा है। ऐसे में लोगों को घरों में ही इबादत करनी चाहिए वह भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ। इसी तरह शीशे वाली मस्जिद के मौलाना नादिर हुसैन ने भी घरों में रहकर अलविदा और ईद की नमाज अदा करने की अपील की है।
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जिस रफ्तार से मरीज बढ़ रहे हैं, उससे लॉकडाउन बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। सरकार के निर्देशों का हम अक्षरश: पालन करेंगे। सोशल डिस्टेंसिंग में रहकर ही इस महामारी पर काबू पाया जा सकता है। ऐसे में अलविदा और ईद की नमाज के लिए मस्जिदों में उतने ही लोग जाएंगे, जितने लोगों को प्रशासन की ओर से अनुमति मिलेगी। बाकी लोग घरों पर ही इबादत करें।
मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी- शहर काजी।
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इस्लामिक धर्मगुरुओं के मुताबिक की अलविदा और ईद पर नमाज की मान्यता मस्जिदों से ही है। लेकिन इस बार के हालात कोरोना महामारी के संक्रमण की वजह से कुच और ही हैं। कहीं भी भीड़ या जमात मेें खड़े होने पर रोक है। ऐसे में ईद की नमाज पर इस बार मस्जिदों में उतने ही लोग प्रवेश कर सकेंगे, जिन्हें प्रशासन अनुमति देगा। मान्यता के अनुसार रमजान की बड़ी फजीलत है और हदीस शरीफ में देखा जाए तो इस महीने में नेकियोें और रहमतों की बारिश होती है। अल्लाह ताला तीसरे असरे में बंदों की हर इबादत कबूल कर लेता है। चौदहो पीर के सज्जादानशीन सुल्तान अहमद बताते हैं कि रमजान रम्ज से बना है।
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इस महीने में रोजा रखने और इबादत करने से हर तरह के कष्टों, गुनाहों और बलाओं को जलाया जा सकता है। इस बार के रमजान की इबादत से पूरी उम्मीद है कि अल्लाह ताला कोरोना महामारी को जलाकर नष्ट कर देगा। रही बात अलविदा और ईद के नमाज ीक तो कोरोना के संक्रमण के दौर में बचाव के जो भी तरीके सरकार अपना रही है, उसका स्वागत है। महामारी से बचने के लिए लॉकडाउन के अलावा कोई और तरीका या रास्ता नहीं बचा है। ऐसे में लोगों को घरों में ही इबादत करनी चाहिए वह भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ। इसी तरह शीशे वाली मस्जिद के मौलाना नादिर हुसैन ने भी घरों में रहकर अलविदा और ईद की नमाज अदा करने की अपील की है।
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जिस रफ्तार से मरीज बढ़ रहे हैं, उससे लॉकडाउन बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। सरकार के निर्देशों का हम अक्षरश: पालन करेंगे। सोशल डिस्टेंसिंग में रहकर ही इस महामारी पर काबू पाया जा सकता है। ऐसे में अलविदा और ईद की नमाज के लिए मस्जिदों में उतने ही लोग जाएंगे, जितने लोगों को प्रशासन की ओर से अनुमति मिलेगी। बाकी लोग घरों पर ही इबादत करें।
मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी- शहर काजी।